Correct Answer:
Option B - ‘तीन वेणियाँ मिलती हैं जहाँ’ अर्थात् त्रिवेणी में बहुव्रीrहि समास है। जिस समास का कोई पद प्रधान नहीं होता तथा दोनों पद मिलकर तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं बहुव्रीहि समास होता है। जैसे – त्रिनेत्र, दशमुख, नेकनाम, लम्बोदर, चतुर्भुज। जिस समास का प्रथम पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य (संज्ञा) हो कर्मधारय समास होता है। अर्थात् विशेषण + विशेष्य (संज्ञा) = कर्मधारय जैसे – महात्मा, परमेश्वर, महावीर, नीलकमल, जिस समास का प्रथम पद संख्यावाची तथा दूसरा पद संज्ञा हो, द्विगु समास होता है, जैसे – त्रिभुज, चौराहा, पंचवटी, नवरत्न, दोपहर। जिस समास का दूसरा पद प्रधान हो तत्पुरुष समास होता है, जैसे – गगन-चुम्बी, चिड़ीमार, रसभरा।
B. ‘तीन वेणियाँ मिलती हैं जहाँ’ अर्थात् त्रिवेणी में बहुव्रीrहि समास है। जिस समास का कोई पद प्रधान नहीं होता तथा दोनों पद मिलकर तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं बहुव्रीहि समास होता है। जैसे – त्रिनेत्र, दशमुख, नेकनाम, लम्बोदर, चतुर्भुज। जिस समास का प्रथम पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य (संज्ञा) हो कर्मधारय समास होता है। अर्थात् विशेषण + विशेष्य (संज्ञा) = कर्मधारय जैसे – महात्मा, परमेश्वर, महावीर, नीलकमल, जिस समास का प्रथम पद संख्यावाची तथा दूसरा पद संज्ञा हो, द्विगु समास होता है, जैसे – त्रिभुज, चौराहा, पंचवटी, नवरत्न, दोपहर। जिस समास का दूसरा पद प्रधान हो तत्पुरुष समास होता है, जैसे – गगन-चुम्बी, चिड़ीमार, रसभरा।