Correct Answer:
Option D - भारत शासन अधिनियम, 1919 में 10 वर्ष पर उसकी समीक्षा का प्रावधान था किन्तु 1929 में ब्रिटेन में चुनाव होने के कारण सरकार ने 8 नवम्बर, 1927 ई. को ही साइमन कमीशन की घोषणा कर दी। साइमन कमीशन को ही आमतौर पर इंडियन स्टेच्यूटरी कमीशन के नाम से जाना जाता है। साइमन कमीशन में ब्रिटिश संसद के सात सदस्य सम्मिलित थे, इनमें `हाउस आफ कामन्स' में लिबरल पार्टी (उदारवादी दल) के साइमन अध्यक्ष बनाए गये। 3 फरवरी, 1928 ई. को जिस दिन साइमन कमीशन बम्बई पहुँचा उस दिन देशव्यापी हड़ताल आयोजित की गई। साइमन कमीशन के समक्ष यह काम था कि ब्रिटिश भारतीय प्रांतों में पता लगाए कि सरकार कैसे चल रही है, प्रतिनिधि संस्थाएं कहाँ तक ठीक कार्य कर रही हैं, शिक्षा की कहाँ तक बढ़ोत्तरी हुई है, आदि। फरवरी 1928 तथा अक्टूबर 1928 ई. में साइमन कमीशन ने भारत का दो बार दौरा किया। कमीशन ने मई, 1930 ई. को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके रिपोर्ट में संघीय सरकार के लिए संस्तुति की गयी थी। भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल (वायसराय) लार्ड इरविन के सुझाव पर भारतीयों को साइमन कमीशन से बाहर रखा गया जिसका भारतीय नेताओं ने विरोध किया।
D. भारत शासन अधिनियम, 1919 में 10 वर्ष पर उसकी समीक्षा का प्रावधान था किन्तु 1929 में ब्रिटेन में चुनाव होने के कारण सरकार ने 8 नवम्बर, 1927 ई. को ही साइमन कमीशन की घोषणा कर दी। साइमन कमीशन को ही आमतौर पर इंडियन स्टेच्यूटरी कमीशन के नाम से जाना जाता है। साइमन कमीशन में ब्रिटिश संसद के सात सदस्य सम्मिलित थे, इनमें `हाउस आफ कामन्स' में लिबरल पार्टी (उदारवादी दल) के साइमन अध्यक्ष बनाए गये। 3 फरवरी, 1928 ई. को जिस दिन साइमन कमीशन बम्बई पहुँचा उस दिन देशव्यापी हड़ताल आयोजित की गई। साइमन कमीशन के समक्ष यह काम था कि ब्रिटिश भारतीय प्रांतों में पता लगाए कि सरकार कैसे चल रही है, प्रतिनिधि संस्थाएं कहाँ तक ठीक कार्य कर रही हैं, शिक्षा की कहाँ तक बढ़ोत्तरी हुई है, आदि। फरवरी 1928 तथा अक्टूबर 1928 ई. में साइमन कमीशन ने भारत का दो बार दौरा किया। कमीशन ने मई, 1930 ई. को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके रिपोर्ट में संघीय सरकार के लिए संस्तुति की गयी थी। भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल (वायसराय) लार्ड इरविन के सुझाव पर भारतीयों को साइमन कमीशन से बाहर रखा गया जिसका भारतीय नेताओं ने विरोध किया।