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  • A. विद्यार्थियों की त्रुटियों को जानकर उनके तर्क का विश्लेषण किया जाए।
  • B. ऐसे कार्यों की अभिकल्पना की जाए जिनमें एक से अधिक स्तर के उत्तर प्राप्त हो सकते हैं।
  • C. मुख्यत: समूह संचालित कार्यों का प्रयोग किया जाए।
  • D. ऐसे कार्यों की अभिकल्पना की जाए कि यंत्रवत् रटने और संकल्पना समझ में अन्तर किया जा सके।
Correct Answer: Option C - मूल्यांकन योजनाबद्ध शिक्षा का अभिन्न भाग है। चालू शिक्षण प्रक्रिया ब्लूम के पारंगति उपागम शिक्षण मॉडल पर आधारित है। इसमें मूल्यांकन की प्रधान भूमिका है। गणित शिक्षण में मूल्यांकन के प्रकार्यों को तीन प्रमुख संवर्गों में रखा जा सकता है–प्रथम संवर्ग–मानक सन्दर्भित, द्वितीय संवर्ग–कसौटी सन्र्दिभत तथा तृतीय संवर्ग–द्वैत प्रयोजन प्रकार्यों का है। समूह संचालित कार्यों का प्रयोग करके प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों के गणित-अधिगम का मूल्यांकन करना प्रभावशाली योजना नहीं है।
C. मूल्यांकन योजनाबद्ध शिक्षा का अभिन्न भाग है। चालू शिक्षण प्रक्रिया ब्लूम के पारंगति उपागम शिक्षण मॉडल पर आधारित है। इसमें मूल्यांकन की प्रधान भूमिका है। गणित शिक्षण में मूल्यांकन के प्रकार्यों को तीन प्रमुख संवर्गों में रखा जा सकता है–प्रथम संवर्ग–मानक सन्दर्भित, द्वितीय संवर्ग–कसौटी सन्र्दिभत तथा तृतीय संवर्ग–द्वैत प्रयोजन प्रकार्यों का है। समूह संचालित कार्यों का प्रयोग करके प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों के गणित-अधिगम का मूल्यांकन करना प्रभावशाली योजना नहीं है।

Explanations:

मूल्यांकन योजनाबद्ध शिक्षा का अभिन्न भाग है। चालू शिक्षण प्रक्रिया ब्लूम के पारंगति उपागम शिक्षण मॉडल पर आधारित है। इसमें मूल्यांकन की प्रधान भूमिका है। गणित शिक्षण में मूल्यांकन के प्रकार्यों को तीन प्रमुख संवर्गों में रखा जा सकता है–प्रथम संवर्ग–मानक सन्दर्भित, द्वितीय संवर्ग–कसौटी सन्र्दिभत तथा तृतीय संवर्ग–द्वैत प्रयोजन प्रकार्यों का है। समूह संचालित कार्यों का प्रयोग करके प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों के गणित-अधिगम का मूल्यांकन करना प्रभावशाली योजना नहीं है।