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Q: यदि हिमालय-पर्वत-श्रेणियाँ नहीं होती तो भारत पर सर्वाधिक संभाव्य भौगोलिक प्रभाव क्या होता? 1. देश के अधिकांश भाग में साइबेरिया से आने वाली शीत लहरों का अनुभव होता। 2. सिंध -गंगा मैदान इतनी सुविस्तृत जलोढ़ मृदा से वंचित होता। 3. मानसून का प्रतिरूप वर्तमान प्रतिरूप से भिन्न होता। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
Correct Answer: Option D - भारत की उत्तरी सीमा पर यदि हिमालय नहीं होता तो देश के अधिकांश भाग में साइबेरिया से आने वाली शीत लहरों का अनुभव होता, जो उत्तर भारत के जनजीवन को अस्त व्यस्त कर देती और न ही मैदानी क्षेत्र में हिमालय के हिमनद से निकलने वाली नदियाँ ही होती जो इतने विस्तृत प्रदेशों में जलोढ़ मृदा का सृजन करती हैं, जिसमें विशाल जनसंख्या निवास करती है उससे उत्तरी भारत वंचित हो जाता। हिमालय के न रहने से उत्तरी भारत का विस्तृत क्षेत्र अरब सागरीय मानसून से वंचित हो जाता जिससे उत्तरी भारत का विस्तृत मैदानी क्षेत्र रेगिस्तान हो जाता।
D. भारत की उत्तरी सीमा पर यदि हिमालय नहीं होता तो देश के अधिकांश भाग में साइबेरिया से आने वाली शीत लहरों का अनुभव होता, जो उत्तर भारत के जनजीवन को अस्त व्यस्त कर देती और न ही मैदानी क्षेत्र में हिमालय के हिमनद से निकलने वाली नदियाँ ही होती जो इतने विस्तृत प्रदेशों में जलोढ़ मृदा का सृजन करती हैं, जिसमें विशाल जनसंख्या निवास करती है उससे उत्तरी भारत वंचित हो जाता। हिमालय के न रहने से उत्तरी भारत का विस्तृत क्षेत्र अरब सागरीय मानसून से वंचित हो जाता जिससे उत्तरी भारत का विस्तृत मैदानी क्षेत्र रेगिस्तान हो जाता।

Explanations:

भारत की उत्तरी सीमा पर यदि हिमालय नहीं होता तो देश के अधिकांश भाग में साइबेरिया से आने वाली शीत लहरों का अनुभव होता, जो उत्तर भारत के जनजीवन को अस्त व्यस्त कर देती और न ही मैदानी क्षेत्र में हिमालय के हिमनद से निकलने वाली नदियाँ ही होती जो इतने विस्तृत प्रदेशों में जलोढ़ मृदा का सृजन करती हैं, जिसमें विशाल जनसंख्या निवास करती है उससे उत्तरी भारत वंचित हो जाता। हिमालय के न रहने से उत्तरी भारत का विस्तृत क्षेत्र अरब सागरीय मानसून से वंचित हो जाता जिससे उत्तरी भारत का विस्तृत मैदानी क्षेत्र रेगिस्तान हो जाता।