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Q: ‘यच्छलेनाभ्युपेतम्’ अस्य सन्धि-विच्छेद: अस्ति–
  • A. यच्छले + नाभ्युपेतम्
  • B. यच्छलेना + भ्युपेतम्
  • C. यच्छल + इनाभ्युपेतम्
  • D. यच्छलेन + अभ्युपेतम्
Correct Answer: Option D - यच्छलेनाभ्युपेतम् में सन्धि है–यच्छलेन+अभ्युपेतम्। इसमें दीर्घ सन्धि है। अक: सवर्णे दीर्घ: अर्थात् यदि हृस्व अथवा दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के बाद क्रमश: हृस्व अथवा दीर्घ अ, इ. उ, ऋ आये तो उन दोनों के स्थान पर क्रमश: आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं।
D. यच्छलेनाभ्युपेतम् में सन्धि है–यच्छलेन+अभ्युपेतम्। इसमें दीर्घ सन्धि है। अक: सवर्णे दीर्घ: अर्थात् यदि हृस्व अथवा दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के बाद क्रमश: हृस्व अथवा दीर्घ अ, इ. उ, ऋ आये तो उन दोनों के स्थान पर क्रमश: आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं।

Explanations:

यच्छलेनाभ्युपेतम् में सन्धि है–यच्छलेन+अभ्युपेतम्। इसमें दीर्घ सन्धि है। अक: सवर्णे दीर्घ: अर्थात् यदि हृस्व अथवा दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के बाद क्रमश: हृस्व अथवा दीर्घ अ, इ. उ, ऋ आये तो उन दोनों के स्थान पर क्रमश: आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं।