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Q: Who of the following Officer controlled the collection of districts in his province? निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकारी अपने प्रान्त के जिलों के संग्रहण को नियंत्रित करता था?
  • A. Samaharta/समाहर्ता
  • B. Sannidhata/सन्निधाता
  • C. Sthanika/स्थानिक
  • D. Councillors/परामर्शदाता
Correct Answer: Option A - मौर्य प्रशासन का भारतीय प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ भारत की प्रथम केन्द्रीकृत प्रशासन प्रणाली का उल्लेख है। प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा होता था। वह कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका का प्रमुख था। अर्थशास्त्र में 18 तीर्थों का उल्लेख है। कुछ महत्वपूर्ण तीर्थ निम्न हैं- – समाहर्ता – यह राजस्व विभाग का प्रधान अधिकारी था। – सन्निधाता – यह राजकीय कोषाध्यक्ष था। – सेनापति – यह युद्ध विभाग का मंत्री था। – युवराज – यह राजा का उत्तराधिकारी होता था। – प्रदेष्टा – फौजदारी न्यायालय का न्यायाधीश था। – व्यवहारिक – दीवानी न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश था। ध्यातव्य है कि समाहर्ता अपने प्रांत के जिलों के राजस्व संग्रह को नियंत्रित करता था।
A. मौर्य प्रशासन का भारतीय प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ भारत की प्रथम केन्द्रीकृत प्रशासन प्रणाली का उल्लेख है। प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा होता था। वह कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका का प्रमुख था। अर्थशास्त्र में 18 तीर्थों का उल्लेख है। कुछ महत्वपूर्ण तीर्थ निम्न हैं- – समाहर्ता – यह राजस्व विभाग का प्रधान अधिकारी था। – सन्निधाता – यह राजकीय कोषाध्यक्ष था। – सेनापति – यह युद्ध विभाग का मंत्री था। – युवराज – यह राजा का उत्तराधिकारी होता था। – प्रदेष्टा – फौजदारी न्यायालय का न्यायाधीश था। – व्यवहारिक – दीवानी न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश था। ध्यातव्य है कि समाहर्ता अपने प्रांत के जिलों के राजस्व संग्रह को नियंत्रित करता था।

Explanations:

मौर्य प्रशासन का भारतीय प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ भारत की प्रथम केन्द्रीकृत प्रशासन प्रणाली का उल्लेख है। प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा होता था। वह कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका का प्रमुख था। अर्थशास्त्र में 18 तीर्थों का उल्लेख है। कुछ महत्वपूर्ण तीर्थ निम्न हैं- – समाहर्ता – यह राजस्व विभाग का प्रधान अधिकारी था। – सन्निधाता – यह राजकीय कोषाध्यक्ष था। – सेनापति – यह युद्ध विभाग का मंत्री था। – युवराज – यह राजा का उत्तराधिकारी होता था। – प्रदेष्टा – फौजदारी न्यायालय का न्यायाधीश था। – व्यवहारिक – दीवानी न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश था। ध्यातव्य है कि समाहर्ता अपने प्रांत के जिलों के राजस्व संग्रह को नियंत्रित करता था।