Correct Answer:
Option B - पुâटकर व्यय या आकस्मिक परिव्यय (Contingencies)– निर्माण के दौरान अनेक प्रकार के छोटे-मोटे, परन्तु आवश्यक व्यय भी होते हैं, जिनका पूर्व में स्पष्ट मान नहीं होता है। ऐसे व्यय, फुटकर व्यय के अन्तर्गत आते हैं। यह फुटकर व्यय रोके जायें तो निर्माण प्रगति प्रभावित होती है। इसके लिए प्राक्कलन में, प्राक्कलित राशि का 3% से 5% जोड़ा जाता है।
कार्य प्रभारित स्थापना (Work charged establishment– निर्माण कार्य को सुचारू ढंग से आगे बढ़ाने तथा इस पर प्रभावकारी विभागीय नियंत्रण बनाये रखने के लिए, निर्माण स्थल पर कुछ अतिरिक्त कर्मचारियों/श्रमिकों की जैसे फोरमैन, सर्वेयर, वर्क मिस्त्री, मेट, मुन्शी, गेटकीपर, चौकीदार इत्यादि की नितान्त आवश्यकता पड़ती है। इस स्थापना को कार्य-प्रभारित स्थापना कहते हैं।
निर्माण कार्य की समाप्ति पर, इस स्थापना की छटनी कर दी जाती है। इसके लिए प्राक्कलन में, प्राक्कलित राशि का से 2% रखा जाता है।
B. पुâटकर व्यय या आकस्मिक परिव्यय (Contingencies)– निर्माण के दौरान अनेक प्रकार के छोटे-मोटे, परन्तु आवश्यक व्यय भी होते हैं, जिनका पूर्व में स्पष्ट मान नहीं होता है। ऐसे व्यय, फुटकर व्यय के अन्तर्गत आते हैं। यह फुटकर व्यय रोके जायें तो निर्माण प्रगति प्रभावित होती है। इसके लिए प्राक्कलन में, प्राक्कलित राशि का 3% से 5% जोड़ा जाता है।
कार्य प्रभारित स्थापना (Work charged establishment– निर्माण कार्य को सुचारू ढंग से आगे बढ़ाने तथा इस पर प्रभावकारी विभागीय नियंत्रण बनाये रखने के लिए, निर्माण स्थल पर कुछ अतिरिक्त कर्मचारियों/श्रमिकों की जैसे फोरमैन, सर्वेयर, वर्क मिस्त्री, मेट, मुन्शी, गेटकीपर, चौकीदार इत्यादि की नितान्त आवश्यकता पड़ती है। इस स्थापना को कार्य-प्रभारित स्थापना कहते हैं।
निर्माण कार्य की समाप्ति पर, इस स्थापना की छटनी कर दी जाती है। इसके लिए प्राक्कलन में, प्राक्कलित राशि का से 2% रखा जाता है।