Correct Answer:
Option C - सम्प्रभुता के एकलवादी सिद्धान्त के समर्थक बोदां, हॉब्स, लॉक, रूसो, आस्टिन इत्यादि है इनके अनुसार सम्प्रभुता का निवास स्थान राजा या शासक के पास है और ये सम्प्रभुता में विभाजन स्वीकार नहीं करते हैं। बहुलवादी विचारधारा के अनुसार, राजसत्ता सम्प्रभु एवं निरकुंश नहीं है। समाज में विद्यमान अन्य अनेक समुदायों का अस्तित्व राजसत्ता को सीमित कर देता है। व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केवल राज्य की ही सदस्यता स्वीकार नहीं करता बल्कि राज्य के साथ-साथ दूसरे अनेक समुदायों और संघों की सदस्यता भी स्वीकार करता है। ऐसी स्थिति में एकमात्र राज्य को सम्पूर्ण सत्ता प्रदान नहीं की जा सकती है। बहुलवादी विचारधारा का समर्थन करने वाले प्रमुख विचारक है – गियर्क, मैटलैण्ड, फिगिस, डिग्विट, क्रेब, पाल, बंकर, ए०डी लिण्डसे, दुर्खीम, मिस फॉलेट, अर्नेस्ट बार्कर, जी० डी० एच० कोल, हैराल्ड लास्की।
इसके विपरीत बोंदा, हॉब्स, हीगल, ऑस्टिन आदि विद्धानों ने सम्प्रभुता की अद्वैतवादिता का प्रतिपादन किया है। जिसका तात्पर्य है कि प्रत्येक राज्य में एक ही सम्प्रभुता होती है। इस धारणा के अनुसार राज्य की यह शक्ति मौलिक, स्थायी, सर्वव्यापी तथा अविभाजनीय होती है।
C. सम्प्रभुता के एकलवादी सिद्धान्त के समर्थक बोदां, हॉब्स, लॉक, रूसो, आस्टिन इत्यादि है इनके अनुसार सम्प्रभुता का निवास स्थान राजा या शासक के पास है और ये सम्प्रभुता में विभाजन स्वीकार नहीं करते हैं। बहुलवादी विचारधारा के अनुसार, राजसत्ता सम्प्रभु एवं निरकुंश नहीं है। समाज में विद्यमान अन्य अनेक समुदायों का अस्तित्व राजसत्ता को सीमित कर देता है। व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केवल राज्य की ही सदस्यता स्वीकार नहीं करता बल्कि राज्य के साथ-साथ दूसरे अनेक समुदायों और संघों की सदस्यता भी स्वीकार करता है। ऐसी स्थिति में एकमात्र राज्य को सम्पूर्ण सत्ता प्रदान नहीं की जा सकती है। बहुलवादी विचारधारा का समर्थन करने वाले प्रमुख विचारक है – गियर्क, मैटलैण्ड, फिगिस, डिग्विट, क्रेब, पाल, बंकर, ए०डी लिण्डसे, दुर्खीम, मिस फॉलेट, अर्नेस्ट बार्कर, जी० डी० एच० कोल, हैराल्ड लास्की।
इसके विपरीत बोंदा, हॉब्स, हीगल, ऑस्टिन आदि विद्धानों ने सम्प्रभुता की अद्वैतवादिता का प्रतिपादन किया है। जिसका तात्पर्य है कि प्रत्येक राज्य में एक ही सम्प्रभुता होती है। इस धारणा के अनुसार राज्य की यह शक्ति मौलिक, स्थायी, सर्वव्यापी तथा अविभाजनीय होती है।