Correct Answer:
Option A - दिये गये प्रश्न में राजभाषा संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में असत्य कथन है- ‘‘अनुच्छेद 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न करें तब तक न्यायालयों में सभी कार्य द्विभाषी होंगे। तथा अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्य विधानमण्डल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं तथा हिन्दी को सरकारी प्रयोजनों में स्वीकार कर सकेगा।’’ जब कि सत्य कथन इस प्रकार है- ‘‘अनुच्छेद 348 में जब तक संसद विधि द्वारा उपबन्ध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाहियाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी।’’
अनुच्छेद 345 - किसी राज्य का विधान मण्डल, विधि द्वारा उस राज्य में इस्तेमाल होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिन्दी को उस राज्य के सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए अंगीकार कर सकता है। जब तक ऐसा नहीं किया जाता, अंग्रेजी का प्रयोग उसी प्रकार किया जाता रहेगा जिस प्रकार उससे ठीक पहले किया जा रहा था।
A. दिये गये प्रश्न में राजभाषा संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में असत्य कथन है- ‘‘अनुच्छेद 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न करें तब तक न्यायालयों में सभी कार्य द्विभाषी होंगे। तथा अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्य विधानमण्डल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं तथा हिन्दी को सरकारी प्रयोजनों में स्वीकार कर सकेगा।’’ जब कि सत्य कथन इस प्रकार है- ‘‘अनुच्छेद 348 में जब तक संसद विधि द्वारा उपबन्ध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाहियाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी।’’
अनुच्छेद 345 - किसी राज्य का विधान मण्डल, विधि द्वारा उस राज्य में इस्तेमाल होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिन्दी को उस राज्य के सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए अंगीकार कर सकता है। जब तक ऐसा नहीं किया जाता, अंग्रेजी का प्रयोग उसी प्रकार किया जाता रहेगा जिस प्रकार उससे ठीक पहले किया जा रहा था।