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Q: Which one of the following indexes is most suitable for measuring the intensity of poverty in India? निम्नलिखित में से कौन-सा एक सूचकांक भारत में गरीबी की तीव्रता की माप के लिए सबसे उपयुक्त है?
  • A. Human Development Index/मानव विकास सूचकांक
  • B. Gender Inequality Index/लिंग असमानता सूचकांक
  • C. Human Poverty Index/मानव गरीबी सूचकांक
  • D. Multi-dimensional Poverty Index बहु–आयामी गरीबी सूचकांक
Correct Answer: Option D - बहुआयामी गरीबी सूचकांक की धारणा गरीबी की व्याख्या करने के लिए तीन चरों स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन निर्वाह स्तर को आधार मानती है। इसे ऑक्सफोर्ड गरीबी, मानव विकास पहल (OPHI) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा वर्ष 2010 में विकसित किया गया था। इस प्रकार वंचन को अधिक व्यापक संदर्भ में लिया गया है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक की गणना के लिए 3 मुख्य और 10 उपचरों को लिया गया है। `सुरेश तेंदुलकर कमेटी' की संस्तुतियाँ भी गरीबी के परम्परागत रूप से हटकर इसे बहुआयामी रूप में लेती हैं। तेंदुलकर कमेटी के अनुसार गरीबी रेखा का निर्धारण या गरीबी की तीव्रता के माप के लिए उपयोग में लाए जा रहे खाद्यान्नों के अलावा छ: बुनियादी आवश्यकताओं – शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी संरचना, स्वच्छ वातावरण तथा महिलाओं की श्रम तथा लाभ तक पहुँच के आधार पर होगा। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि बहुआयामी गरीबी सूचकांक भारत में गरीबी की तीव्रता की माप के लिए सबसे उपयुक्त है।
D. बहुआयामी गरीबी सूचकांक की धारणा गरीबी की व्याख्या करने के लिए तीन चरों स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन निर्वाह स्तर को आधार मानती है। इसे ऑक्सफोर्ड गरीबी, मानव विकास पहल (OPHI) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा वर्ष 2010 में विकसित किया गया था। इस प्रकार वंचन को अधिक व्यापक संदर्भ में लिया गया है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक की गणना के लिए 3 मुख्य और 10 उपचरों को लिया गया है। `सुरेश तेंदुलकर कमेटी' की संस्तुतियाँ भी गरीबी के परम्परागत रूप से हटकर इसे बहुआयामी रूप में लेती हैं। तेंदुलकर कमेटी के अनुसार गरीबी रेखा का निर्धारण या गरीबी की तीव्रता के माप के लिए उपयोग में लाए जा रहे खाद्यान्नों के अलावा छ: बुनियादी आवश्यकताओं – शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी संरचना, स्वच्छ वातावरण तथा महिलाओं की श्रम तथा लाभ तक पहुँच के आधार पर होगा। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि बहुआयामी गरीबी सूचकांक भारत में गरीबी की तीव्रता की माप के लिए सबसे उपयुक्त है।

Explanations:

बहुआयामी गरीबी सूचकांक की धारणा गरीबी की व्याख्या करने के लिए तीन चरों स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन निर्वाह स्तर को आधार मानती है। इसे ऑक्सफोर्ड गरीबी, मानव विकास पहल (OPHI) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा वर्ष 2010 में विकसित किया गया था। इस प्रकार वंचन को अधिक व्यापक संदर्भ में लिया गया है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक की गणना के लिए 3 मुख्य और 10 उपचरों को लिया गया है। `सुरेश तेंदुलकर कमेटी' की संस्तुतियाँ भी गरीबी के परम्परागत रूप से हटकर इसे बहुआयामी रूप में लेती हैं। तेंदुलकर कमेटी के अनुसार गरीबी रेखा का निर्धारण या गरीबी की तीव्रता के माप के लिए उपयोग में लाए जा रहे खाद्यान्नों के अलावा छ: बुनियादी आवश्यकताओं – शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी संरचना, स्वच्छ वातावरण तथा महिलाओं की श्रम तथा लाभ तक पहुँच के आधार पर होगा। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि बहुआयामी गरीबी सूचकांक भारत में गरीबी की तीव्रता की माप के लिए सबसे उपयुक्त है।