Correct Answer:
Option D - कंक्रीट में नि:स्रवण से अभिप्राय यह है कि कंक्रीट बिछाते समय करनी चलाने अथवा कुटाई करने पर उसके ऊपरी सतह पर पानी, जिसमें सीमेन्ट बालू के महीन कण भी घुले रहते है का प्रकट होना कंक्रीट का नि:स्रवण कहलाता है। कंक्रीट में नि:स्रवण उसमें आन्तरिक रन्ध्रों का निर्माण होना होता है, जिससे उसकी मजबूती घट जाती है। कंक्रीट में ठोस संघटकों के बैठ जाने के कारण भी उसमें नि:स्रवण होता है। यह जल प्राप्ति (water gain) भी कहलाता है।
D. कंक्रीट में नि:स्रवण से अभिप्राय यह है कि कंक्रीट बिछाते समय करनी चलाने अथवा कुटाई करने पर उसके ऊपरी सतह पर पानी, जिसमें सीमेन्ट बालू के महीन कण भी घुले रहते है का प्रकट होना कंक्रीट का नि:स्रवण कहलाता है। कंक्रीट में नि:स्रवण उसमें आन्तरिक रन्ध्रों का निर्माण होना होता है, जिससे उसकी मजबूती घट जाती है। कंक्रीट में ठोस संघटकों के बैठ जाने के कारण भी उसमें नि:स्रवण होता है। यह जल प्राप्ति (water gain) भी कहलाता है।