A man sold an article for `481 by first giving a d% discount on its marked price, and then another discount having the same nominal value (in `). If the marked price of the article is `1924, then what is the value of d? एक व्यक्ति ने एक वस्तु को इसके अंकित मूल्य पर पहले d% की छूट और फिर उतने ही सममूल्य (`में) की एक और छूट देकर `481 में बेचा। यदि वस्तु का अंकित मूल्य `1924 है, तो d का मान क्या है?
भारत वर्ष इनमें से किसमें सर्वोत्तम स्थिति में है?
किस फाइल द्वारा ‘वी’ के आकार के खाँचे काटे जाते हैं?
‘B’ ‘A’ का पुत्र है जिसका C से विवाह हुआ है जबकि ‘D’ का विवाह ‘E’ से हुआ था। यदि ‘E’ ‘B’ का भाई है तो ‘D’ का ‘A’ से क्या संबंध है।
Who among the following had ousted Jainism from Mysore?/निम्नलिखित में से किसने जैन धर्म को मैसूर से निकाल दिया था?
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पीएम मोदी ने भारत के पहले कमर्शियल सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन सर्विस की आधारशिला कहां रखी?
गुरुत्वाकर्षण का सार्वभौमिक नियम ............... पर लागू होता है।
प्रोटीन मुख्यत: इनमें से किस रूप में अवशोषित किए जाते हैं?
निर्देश : नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 325से 333) के सही/सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। उत्तर भारत के संत कवि कबीर और दक्षिण भारत के संत कवि तिरुवल्लुवर के समय में लगभग दो हजार वर्ष का अंतराल है किंतु इन दोनों महाकवियों के जीवन में अद्भभुत साम्य पाया जाता है। दोनों के माता-पिता ने जन्म देकर इन्हें त्याग दिया था, दोनों का लालन-पालन निस्संतान ने बड़े स्नेह और जतन से किया था। व्यवसाय से दोनों जुलाहे थे। दोनों ने सात्विक गृहस्थ जीवन की साधना की थी। तिरुवल्लुवर का प्रामाणिक जीवन-वृत्तांत प्राप्त नहीं होता। प्राय: उन्हें चेन्नई के निकट मइलापुर गाँव का जुलाहा माना जाता है किंतु कुछ लोगों के अनुसार वे राजा एल्लाल के शासन में एक बड़े पदाधिकारी थे और उन्हें वैसा ही सम्मान प्राप्त था जैसा चंद्रगुप्त के शासनकाल में चाणक्य को। उनके बारे में अनेक दंतकथाएँ प्रचलित हैं। जैसे कहा जाता है कि एक संन्यासी नारी जाति से घृणा करता था। उसका विश्वास था कि स्त्रियाँ बुराई की जड़ हैं और उनके साथ ईश्वर-भक्ति हो ही नहीं सकती। तिरुवल्लुवर ने बड़े आदर से उसे अपने घर बुलाया। दो दिन उनके परिवार में रहकर सन्यासी के विचार ही बदल गए। उसने कहा, ‘यदि तिरूवल्लुवर और उनकी पत्नी जैसी जोड़ी हो तो गृहस्थ जीवन ही श्रेष्ठ है।’’ कबीर के दोहों की भाँति तिरुवल्लुवर ने भी छोटे छंद में कविता रची जिसे ‘कुरल’ कहा जाता है। कुरलों का संग्रह उनका एकमात्र ग्रंथ है ‘तिरुवल्लुवर’। तिरुवल्लुरल को तमिल भाषा का वेद माना जाता है। इसका प्रत्येक कुरल एक सूक्ति है और सूक्तियाँ सभी धर्मों का सार है। संपूर्ण मानवजाति को शुभ के लिए प्रेरित करना ही इसका उद्देश्य प्रतीत होता है। जैसे धर्म के बारे में दो कुरलो का आशय है : ⦁ भद्र पुरूषों! पवित्र मानव होना ही धर्म है। स्वच्छ मन वाले बनो और देखो तुम उन्नति के शिखर पर कहाँ-से-कहाँ पहुँच जाते हो। ⦁ झूठ न बोलने के गुण को ग्रहण करो तो किसी अन्य धर्म की आवश्यकता ही न रहेगी। नारी जाति से घृणा करने वाले संन्यासी के विचार तिरुवल्लुर ने कैसे बदले?
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