Correct Answer:
Option D - रेन के अनुसार, ‘‘जिस प्रकार स्थल सेना, जलसेना या राज्य के अस्तित्व के लिए अनुशासन का होना परमावश्यक है, उसी भाँति अनुशासन मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है। मनुष्य के सम्पूर्ण कार्य इसके अभाव में सुचारू रुप से संचालित नहीं किया जा सकता है। इसके अभाव में अराजकता का साम्राज्य हो जायेगा। अनुशासन के कुछ सकारात्मक साधन होते है तथा कुछ नकारात्मक होते है। सकारात्मक रूप से देखा जाए तो राजनीतिक और औद्योगिक कारणों से, वर्तमान सामाजिक संरचना में अनुशासन एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। इसी प्रकार नकारात्मक रूप में देखा जाए तो अनुशासन के खतरों में एक यह है कि व्यवस्था उन मनुष्यों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होती है जो इसमें संलग्न है।
D. रेन के अनुसार, ‘‘जिस प्रकार स्थल सेना, जलसेना या राज्य के अस्तित्व के लिए अनुशासन का होना परमावश्यक है, उसी भाँति अनुशासन मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है। मनुष्य के सम्पूर्ण कार्य इसके अभाव में सुचारू रुप से संचालित नहीं किया जा सकता है। इसके अभाव में अराजकता का साम्राज्य हो जायेगा। अनुशासन के कुछ सकारात्मक साधन होते है तथा कुछ नकारात्मक होते है। सकारात्मक रूप से देखा जाए तो राजनीतिक और औद्योगिक कारणों से, वर्तमान सामाजिक संरचना में अनुशासन एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। इसी प्रकार नकारात्मक रूप में देखा जाए तो अनुशासन के खतरों में एक यह है कि व्यवस्था उन मनुष्यों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होती है जो इसमें संलग्न है।