Explanations:
जैनों के पवित्र ग्रंथ सिद्धान्त या आगम के रूप में जाने जाते हैं । जैन साहित्य को ‘आगम’ या सिद्धान्त भी कहते हैं। इनकी रचना प्राकृत भाषा (अर्धमागधी) में की गयी है। पाली भाषा का शाब्दिक अर्थ है पवित्र रचना। बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक की रचना पाली भाषा में हुई है। अर्ध-मागधी भाषा पालि की पूर्वी बोली न होकर उसकी सहायक भाषा है। अर्ध-मागधी भाषा मागधी तथा शौरसेनी भाषा का मिश्रित रूप है। जैन साहित्य अर्ध-मागधी के अतिरिक्त संस्कृत तथा अप्रभंश भाषा में भी लिखा गया है।