Correct Answer:
Option A - पर्यावरणीय शिक्षा मे प्राकृतिक एवं मनुष्य निर्मित पर्यावरण का समावेश उसकी अन्त:अनुशासनिक प्रकृति को दर्शाता है। वस्तुत: पर्यावरणीय शिक्षा को किसी एक विषय के अन्तर्गत नहीं रखा जा सकता है। यह सभी विषयों से अन्तर्दृष्टि प्राप्त करके वातावरण के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास करता है। पर्यावरणीय शिक्षा केवल कला अथवा विज्ञान नहीं है बल्कि इसके अन्तर्गत सभी विषय, जैसे: जीवविज्ञान, भौतिक विज्ञान, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, तकनीकी, दर्शनशास्त्र एवं सौन्दर्यशास्त्र आदि शाखाओं को सम्मिलित किया जाता है। पर्यावरणीय शिक्षा का शैक्षिक गतिविधियों में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं–
1. यह सभी छात्रों के लिए सुरक्षित होती है।
2. पर्यावरण शिक्षा विद्यार्थी को जनतांत्रिक नागरिक बनाने में सहायता करती है। उसके अपने अधिकरों एवं कर्तव्यों का बोध होता है। विद्यार्थी में इस शिक्षा द्वारा स्वतन्त्र चिंतन तथा स्वयं निर्णय लेने की शक्ति का विकास होता है।
3. यह विद्यार्थी के वास्तविक जीवन आधारित और आनंदायक बनाती है।
4. पर्यावरण शिक्षा द्वारा विद्यार्थी में प्रकृति प्रेम, अपने पर्यावरण एवं परिवेश से प्रेम, राष्ट्र-प्रेम एवं अन्तर्राष्ट्रीय भाव का विकास किया जा सकता है।
5. पर्यावरण शिक्षा विद्यार्थी को अपने आस-पास होने वाले प्रदूषण को रोकने हेतु जागरूक बनाती है।
A. पर्यावरणीय शिक्षा मे प्राकृतिक एवं मनुष्य निर्मित पर्यावरण का समावेश उसकी अन्त:अनुशासनिक प्रकृति को दर्शाता है। वस्तुत: पर्यावरणीय शिक्षा को किसी एक विषय के अन्तर्गत नहीं रखा जा सकता है। यह सभी विषयों से अन्तर्दृष्टि प्राप्त करके वातावरण के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास करता है। पर्यावरणीय शिक्षा केवल कला अथवा विज्ञान नहीं है बल्कि इसके अन्तर्गत सभी विषय, जैसे: जीवविज्ञान, भौतिक विज्ञान, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, तकनीकी, दर्शनशास्त्र एवं सौन्दर्यशास्त्र आदि शाखाओं को सम्मिलित किया जाता है। पर्यावरणीय शिक्षा का शैक्षिक गतिविधियों में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं–
1. यह सभी छात्रों के लिए सुरक्षित होती है।
2. पर्यावरण शिक्षा विद्यार्थी को जनतांत्रिक नागरिक बनाने में सहायता करती है। उसके अपने अधिकरों एवं कर्तव्यों का बोध होता है। विद्यार्थी में इस शिक्षा द्वारा स्वतन्त्र चिंतन तथा स्वयं निर्णय लेने की शक्ति का विकास होता है।
3. यह विद्यार्थी के वास्तविक जीवन आधारित और आनंदायक बनाती है।
4. पर्यावरण शिक्षा द्वारा विद्यार्थी में प्रकृति प्रेम, अपने पर्यावरण एवं परिवेश से प्रेम, राष्ट्र-प्रेम एवं अन्तर्राष्ट्रीय भाव का विकास किया जा सकता है।
5. पर्यावरण शिक्षा विद्यार्थी को अपने आस-पास होने वाले प्रदूषण को रोकने हेतु जागरूक बनाती है।