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Q: Which of the following is/are the part/parts of the procedure for the impeachment of a Judge of the Supreme Court of India? निम्नलिखित में से कौन से, भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के महाभियोग के लिए प्रक्रिया का/के भाग है/हैं? 1. A motion signed by atleast 100 members of Lok Sabha or 50 members of Rajya Sabha is delivered to the Speaker or Chairman. प्रस्ताव, लोक सभा के कम-से-कम 100 सदस्यों या राज्य सभा से कम-से-कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ स्पीकर या चेयरमैन को दिया जाता है। 2. The motion is investigated by a Committee of three Jurists constituted by the Speaker or Chairman. प्रस्ताव की, स्पीकर या चेयरमैन द्वारा गठित तीन विधिवेत्ताओं की समिति द्वारा जाँच की जाती है। 3. The Judge will be removed by the Speaker or Chairman if the Committee of three Jurists recommends. यदि तीन विधिवेत्ताओं की समिति अनुशंसा करती है तो न्यायाधीश, स्पीकर या चेयरमैन द्वारा हटा दिया जाएगा। Select the correct answer using the code given below : नीचे दिए गए वूâट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
  • A. 1, 2 and 3 / 1, 2 और 3
  • B. 1 and 2 only / केवल 1 और2
  • C. 2 and 3 only / केवल 2 और 3
  • D. 1 only / केवल 1
Correct Answer: Option B - अनुच्छेद 124(4) के तहत उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ही हटाया जा सकता है। न्यायाधीश जांच अधिनियम (1968) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रकिृया का उपबंध करता है– –निष्कासन प्रस्ताव लोक सभा के 100 सदस्यों या राज्य सभा के 50 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद अध्यक्ष/सभापति को दिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को लोक सभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार भी किया जा सकता है। –यदि अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो वह इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करता है। –यदि समिति न्यायाधीश को दोषी पाती है तो दोनों सदनों में इसे विशेष बहुमत से पारित करके राष्ट्रपति को भेजा जाता है। अंत में राष्ट्रपति न्यायाधीश को हटाने का आदेश जारी कर देते हैं।
B. अनुच्छेद 124(4) के तहत उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ही हटाया जा सकता है। न्यायाधीश जांच अधिनियम (1968) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रकिृया का उपबंध करता है– –निष्कासन प्रस्ताव लोक सभा के 100 सदस्यों या राज्य सभा के 50 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद अध्यक्ष/सभापति को दिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को लोक सभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार भी किया जा सकता है। –यदि अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो वह इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करता है। –यदि समिति न्यायाधीश को दोषी पाती है तो दोनों सदनों में इसे विशेष बहुमत से पारित करके राष्ट्रपति को भेजा जाता है। अंत में राष्ट्रपति न्यायाधीश को हटाने का आदेश जारी कर देते हैं।

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अनुच्छेद 124(4) के तहत उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ही हटाया जा सकता है। न्यायाधीश जांच अधिनियम (1968) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रकिृया का उपबंध करता है– –निष्कासन प्रस्ताव लोक सभा के 100 सदस्यों या राज्य सभा के 50 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद अध्यक्ष/सभापति को दिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को लोक सभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार भी किया जा सकता है। –यदि अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो वह इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करता है। –यदि समिति न्यायाधीश को दोषी पाती है तो दोनों सदनों में इसे विशेष बहुमत से पारित करके राष्ट्रपति को भेजा जाता है। अंत में राष्ट्रपति न्यायाधीश को हटाने का आदेश जारी कर देते हैं।