Correct Answer:
Option B - चन्द्रमा को अपनी कक्षा में बनाए रखने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल, पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है।
किसी पिण्ड के तात्क्षणिक वेग के लम्बवत दिशा में पथ के केन्द्र की ओर लगने वाला बल ‘अभिकेन्द्रीय बल’ कहलाता है। अभिकेन्द्र बल के कारण पिण्ड वक्र पथ पर गति करती है।
पृथ्वी के सतह के निकट किसी पिण्ड के इकाई द्रव्यमान पर लगने वाला पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी का गुरुत्व कहलाता है। इसे g से निरुपित करते हैं। इसका मान 9.8m/s² है।
B. चन्द्रमा को अपनी कक्षा में बनाए रखने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल, पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है।
किसी पिण्ड के तात्क्षणिक वेग के लम्बवत दिशा में पथ के केन्द्र की ओर लगने वाला बल ‘अभिकेन्द्रीय बल’ कहलाता है। अभिकेन्द्र बल के कारण पिण्ड वक्र पथ पर गति करती है।
पृथ्वी के सतह के निकट किसी पिण्ड के इकाई द्रव्यमान पर लगने वाला पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी का गुरुत्व कहलाता है। इसे g से निरुपित करते हैं। इसका मान 9.8m/s² है।