Correct Answer:
Option A - कंक्रीट में स्थिर भार के अन्तर्गत विसर्पण विकृति समय पर निर्भर करती है। भार के कारण समय के साथ विकृति का निरन्तर बढ़ना कंक्रीट का विसर्पण या क्रीप कहलाता है। भार घटाने पर यह विकृति पूर्णत: समाप्त नहीं होती है। कुछ विकृति स्थायी रूप से बनी रहती है। इसी स्थायी विकृति को क्रीप या प्लास्टिक विकृति कहते हैं। क्रीप को प्लास्टिक बहाव भी कहते हैं। कंक्रीट में विसर्पण 30वर्ष से अधिक समय तक चलता रहता है। क्रीप के कारण संरचना में दरारे कम पड़ती हैं।
A. कंक्रीट में स्थिर भार के अन्तर्गत विसर्पण विकृति समय पर निर्भर करती है। भार के कारण समय के साथ विकृति का निरन्तर बढ़ना कंक्रीट का विसर्पण या क्रीप कहलाता है। भार घटाने पर यह विकृति पूर्णत: समाप्त नहीं होती है। कुछ विकृति स्थायी रूप से बनी रहती है। इसी स्थायी विकृति को क्रीप या प्लास्टिक विकृति कहते हैं। क्रीप को प्लास्टिक बहाव भी कहते हैं। कंक्रीट में विसर्पण 30वर्ष से अधिक समय तक चलता रहता है। क्रीप के कारण संरचना में दरारे कम पड़ती हैं।