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Q: हिंदू धर्म ‘पुरूषार्थ-जीवन के लक्ष्य, के माध्यम से जीवन में पूर्ण भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। निम्न में से कौन एक पुरूषार्थ नही हैं?
  • A. काम
  • B. सत्व
  • C. मोक्ष
  • D. अर्थ
Correct Answer: Option B - प्राचीन काल में मनुष्य के उद्देश्यपूर्ण जीवन को व्यतीत करने हेतु आश्रम व्यवस्था का निर्धारण किया गया था। निर्धारित आश्रम व्यवस्था की सफलता ‘पुरुषार्थ’ पर ही निर्भर थी। ये पुरुषार्थ हैं– धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इन्हें चर्तुवर्ग भी कहा गया है। पुरुषार्थ के अन्तर्गत मनुष्य भौतिक सुखों का उपभोग करते हुए धर्म का भी समान रूप से अनुसरण करके मोक्ष का अधिकारी होता हैं। अत: दिए गए विकल्प में ‘सत्व’ पुरुषार्थ नहीं है।
B. प्राचीन काल में मनुष्य के उद्देश्यपूर्ण जीवन को व्यतीत करने हेतु आश्रम व्यवस्था का निर्धारण किया गया था। निर्धारित आश्रम व्यवस्था की सफलता ‘पुरुषार्थ’ पर ही निर्भर थी। ये पुरुषार्थ हैं– धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इन्हें चर्तुवर्ग भी कहा गया है। पुरुषार्थ के अन्तर्गत मनुष्य भौतिक सुखों का उपभोग करते हुए धर्म का भी समान रूप से अनुसरण करके मोक्ष का अधिकारी होता हैं। अत: दिए गए विकल्प में ‘सत्व’ पुरुषार्थ नहीं है।

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प्राचीन काल में मनुष्य के उद्देश्यपूर्ण जीवन को व्यतीत करने हेतु आश्रम व्यवस्था का निर्धारण किया गया था। निर्धारित आश्रम व्यवस्था की सफलता ‘पुरुषार्थ’ पर ही निर्भर थी। ये पुरुषार्थ हैं– धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इन्हें चर्तुवर्ग भी कहा गया है। पुरुषार्थ के अन्तर्गत मनुष्य भौतिक सुखों का उपभोग करते हुए धर्म का भी समान रूप से अनुसरण करके मोक्ष का अधिकारी होता हैं। अत: दिए गए विकल्प में ‘सत्व’ पुरुषार्थ नहीं है।