Correct Answer:
Option B - विषय-केन्द्रित दृष्टिकोण अधिगम उपागम में पाठ्यपुस्तक को सीखने का मुख्य स्त्रोत माना जाता है। विषय-केन्द्रित पाठ्यक्रम वह है जिसमें बालक की अपेक्षा विषयों को अधिक महत्व दिया जाता है। चूँकि इस प्रकार के पाठ्यक्रम में पुस्तकों का विशेष महत्व है इसलिए इस पाठ्यक्रम को पुस्तक केन्द्रित पाठ्यक्रम के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार के पाठ्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विषयों के ज्ञान को अलग-अलग रूपों में प्रदान करना होता है। इस पाठ्यक्रम में सभी विषयों के ज्ञान को अलग-अलग निश्चित कर लिया जाता है, तथा उसी के अनुसार पुस्तके तैयार कर ली जाती है। इन्हीं पुस्तकों से बालक विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त करते हैं। इसमें बालकों की अपेक्षा विषय-ज्ञान को अधिक महत्व दिया जाता है। विषय-केन्द्रित पाठ्यक्रम के कुछ गुण है जो कि निम्नलिखित हैं–
1. यह परम्परागत ज्ञान को आगे बढ़ाने का सुविधाजनक तथा सबसे अच्छा साधन है।
2. इस पाठ्यक्रम से छात्र को ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ उसे सुदृढ़ करने तथा जीवन की विभिन्न स्थितियों में प्रयुक्त कर सकने की सुविधा होती है।
3. इसमें अध्ययन-अध्यापन में सुनिश्चित होती है।
4. इसमें नवीन ज्ञान की खोज करने तथा तथ्यों को उपयोगी क्रम में व्यवस्थित करने में भी सुविधा होता है।
5. इस प्रकार के पाठ्यक्रम में कार्य करने, परिवर्तन करने एवं संशोधन करने की पर्याप्त सुविधा और क्षमता होती है।
B. विषय-केन्द्रित दृष्टिकोण अधिगम उपागम में पाठ्यपुस्तक को सीखने का मुख्य स्त्रोत माना जाता है। विषय-केन्द्रित पाठ्यक्रम वह है जिसमें बालक की अपेक्षा विषयों को अधिक महत्व दिया जाता है। चूँकि इस प्रकार के पाठ्यक्रम में पुस्तकों का विशेष महत्व है इसलिए इस पाठ्यक्रम को पुस्तक केन्द्रित पाठ्यक्रम के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार के पाठ्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विषयों के ज्ञान को अलग-अलग रूपों में प्रदान करना होता है। इस पाठ्यक्रम में सभी विषयों के ज्ञान को अलग-अलग निश्चित कर लिया जाता है, तथा उसी के अनुसार पुस्तके तैयार कर ली जाती है। इन्हीं पुस्तकों से बालक विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त करते हैं। इसमें बालकों की अपेक्षा विषय-ज्ञान को अधिक महत्व दिया जाता है। विषय-केन्द्रित पाठ्यक्रम के कुछ गुण है जो कि निम्नलिखित हैं–
1. यह परम्परागत ज्ञान को आगे बढ़ाने का सुविधाजनक तथा सबसे अच्छा साधन है।
2. इस पाठ्यक्रम से छात्र को ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ उसे सुदृढ़ करने तथा जीवन की विभिन्न स्थितियों में प्रयुक्त कर सकने की सुविधा होती है।
3. इसमें अध्ययन-अध्यापन में सुनिश्चित होती है।
4. इसमें नवीन ज्ञान की खोज करने तथा तथ्यों को उपयोगी क्रम में व्यवस्थित करने में भी सुविधा होता है।
5. इस प्रकार के पाठ्यक्रम में कार्य करने, परिवर्तन करने एवं संशोधन करने की पर्याप्त सुविधा और क्षमता होती है।