Correct Answer:
Option B - विद्यालय में भिन्न-भिन्न विषयों का पाठन होता है, प्रत्येक विषय के अपने उद्देश्य होते हैं। गणित शिक्षण के उद्देश्य अन्य विषयों के उद्देश्यों से बिल्कुल ही अलग हैं यदि उनकी पूर्ति हो जाती है तो यह कहा जा सकता है कि अमुक विषय का क्या महत्व हैं। गणित शिक्षण के उद्देश्य की प्राप्ति में जिन छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखना पड़ता है उन्हें प्राप्य उद्देश्य कहते है। प्राप्य उद्देश्य को तैयार करने में बहुत होशियारी रखनी पड़ती है, क्योंकि किसी उद्देश्य की पूर्ति तभी सम्भव है, जब उसके अन्तर्गत तैयार प्राप्य उद्देश्यों की तैयारी सही रूप से की गई हो। इनके मुख्य रूप से दो कार्य है–
1. इनके द्वारा किसी उद्देश्य की पूर्ति होती है।
2. इनके आधार पर पाठ्यवस्तु से प्रश्न तैयार करके बालकों को क्रिया विधि का ज्ञान होता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति में अनेक प्राप्य उद्देश्य रहते है जैसे अनुकूलन, ह्युरिस्टिक्स का उपयोग, अनुमान और सन्निकटन, प्रतिनिधित्व ये सारे गणित शिक्षा के व्यापक और संकुचित उद्देश्य होते हैं। अत: I, II, III, IV सभी सही है।
B. विद्यालय में भिन्न-भिन्न विषयों का पाठन होता है, प्रत्येक विषय के अपने उद्देश्य होते हैं। गणित शिक्षण के उद्देश्य अन्य विषयों के उद्देश्यों से बिल्कुल ही अलग हैं यदि उनकी पूर्ति हो जाती है तो यह कहा जा सकता है कि अमुक विषय का क्या महत्व हैं। गणित शिक्षण के उद्देश्य की प्राप्ति में जिन छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखना पड़ता है उन्हें प्राप्य उद्देश्य कहते है। प्राप्य उद्देश्य को तैयार करने में बहुत होशियारी रखनी पड़ती है, क्योंकि किसी उद्देश्य की पूर्ति तभी सम्भव है, जब उसके अन्तर्गत तैयार प्राप्य उद्देश्यों की तैयारी सही रूप से की गई हो। इनके मुख्य रूप से दो कार्य है–
1. इनके द्वारा किसी उद्देश्य की पूर्ति होती है।
2. इनके आधार पर पाठ्यवस्तु से प्रश्न तैयार करके बालकों को क्रिया विधि का ज्ञान होता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति में अनेक प्राप्य उद्देश्य रहते है जैसे अनुकूलन, ह्युरिस्टिक्स का उपयोग, अनुमान और सन्निकटन, प्रतिनिधित्व ये सारे गणित शिक्षा के व्यापक और संकुचित उद्देश्य होते हैं। अत: I, II, III, IV सभी सही है।