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Q: Which education is a new approach to educating children with disabilities and learning aifficulties विकलांग और अधिगम में कठिनाई वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए कौन सी शिक्षा एक नया दृष्टिकोण है? I. Inclusive Education I. समावेशी शिक्षा II. Non- Education II. अव्याप्क शिक्षा
  • A. Only II/केवल II
  • B. Both I and II/I तथा II दोनों
  • C. Only I/केवल I
  • D. Neither I nor II/ना ही I ना ही I
Correct Answer: Option A - शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चे के समग्र विकास में सुधार लाने के लिए, मूल्यांकन प्रक्रिया को विकास के विद्यालयी क्षेत्रों तथा गैर-विद्यालयी क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। मूल्यांकन में बच्चे के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है कि बच्चे को जो कुछ सिखाय गया उसका उद्देश्य क्या है, सिखाने वाली विधियाँ कितनी सफल रहीं और उसके व्यवहार में कितना परिवर्तन आया। मूल्यांकन द्वारा शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ्यक्रम, उद्देश्य एवं शिक्षण विधियों आदि का स्पष्टीकरण किया जाता है। मूल्यांकन की आवश्यकता – (1) छात्रों के मार्गदर्शन के लिए (2) व्यक्तिगत भिन्नता जानने के लिए (2) आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए (4) शिक्षण विधियों में नवीनीकरण के लिए (5) रुचियों एवं कुशलताओं की जाँच के लिए NCERT ने 1988 में कहा है कि मूल्यांकन आदि का उद्देश्य ‘‘शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाना है।’’
A. शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चे के समग्र विकास में सुधार लाने के लिए, मूल्यांकन प्रक्रिया को विकास के विद्यालयी क्षेत्रों तथा गैर-विद्यालयी क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। मूल्यांकन में बच्चे के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है कि बच्चे को जो कुछ सिखाय गया उसका उद्देश्य क्या है, सिखाने वाली विधियाँ कितनी सफल रहीं और उसके व्यवहार में कितना परिवर्तन आया। मूल्यांकन द्वारा शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ्यक्रम, उद्देश्य एवं शिक्षण विधियों आदि का स्पष्टीकरण किया जाता है। मूल्यांकन की आवश्यकता – (1) छात्रों के मार्गदर्शन के लिए (2) व्यक्तिगत भिन्नता जानने के लिए (2) आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए (4) शिक्षण विधियों में नवीनीकरण के लिए (5) रुचियों एवं कुशलताओं की जाँच के लिए NCERT ने 1988 में कहा है कि मूल्यांकन आदि का उद्देश्य ‘‘शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाना है।’’

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शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चे के समग्र विकास में सुधार लाने के लिए, मूल्यांकन प्रक्रिया को विकास के विद्यालयी क्षेत्रों तथा गैर-विद्यालयी क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। मूल्यांकन में बच्चे के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है कि बच्चे को जो कुछ सिखाय गया उसका उद्देश्य क्या है, सिखाने वाली विधियाँ कितनी सफल रहीं और उसके व्यवहार में कितना परिवर्तन आया। मूल्यांकन द्वारा शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ्यक्रम, उद्देश्य एवं शिक्षण विधियों आदि का स्पष्टीकरण किया जाता है। मूल्यांकन की आवश्यकता – (1) छात्रों के मार्गदर्शन के लिए (2) व्यक्तिगत भिन्नता जानने के लिए (2) आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए (4) शिक्षण विधियों में नवीनीकरण के लिए (5) रुचियों एवं कुशलताओं की जाँच के लिए NCERT ने 1988 में कहा है कि मूल्यांकन आदि का उद्देश्य ‘‘शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाना है।’’