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Q: प्रस्तुत गद्यांश को पढि़ए और उचित विकल्पों का चयन करके उत्तर दीजिये (27से 30) : रास्ते पर खड़ा ये आम का पेड़, सदा से ठूँठ नहीं है। दिन थे जब वह हरा-भरा था और उस जनसंकुल चौराहे पर अपनी छतनार डालियों से बटोहियों की थकान अनजाने दूर करता था। पर मैंने उसे सदा ठूँठ ही देखा है। पत्रहीन, शाखाहीन, निरवलंब, जैसे पृथ्वी रूपी आकाश से सहसा निकलकर अधर में ही टंग गया हो। रात में वह काले भूत-सा लगता है, दिन में उसकी छाया इतनी गहरी नहीं हो पाती जितना काला उसका जिस्म है और अगर चितेरे को छायाचित्र बनाना हो तो शायद उसका-सा ‘अभिप्राय’ और न मिलेगा। प्रचंड धूप में भी उसका सूखा शरीर उतनी ही गहरी छाया जमीन पर डालता जैसे रात की उजियारी चाँदनी में। जब से होश संभाला है, जब से आँख खोली है, देखने का अभ्यास किया है, तब से बराबर मुझे उसका निस्पंद, नीरस, अर्थहीन शरीर ही दिख पड़ा है। पर पिछली पीढ़ी के जानकार कहते हैं कि एक जमाना था जब पीपल और बरगद भी उसके सामने शरमाते थे और उसको पत्तों से, उसकी टहनियों और डालों से टकराती हवा की सरसराहट दूर तक सुनाई पड़ती थी। पर आज वह नीरव है, उस चौराहे का जवाब जिस पर उत्तर दक्षिण, पूरब-पश्चिम चारों ओर की राहें मिलती हैं और जिनके सहारे जीवन अविरल बहता है। जिसने कभी जल को जीवन की संज्ञा दी, उसने निश्चय जाना होगा कि प्राणवान जीवन भी जल की ही भांति विकल, अविरल बहता है। सो प्राणवान जीवन, मानव संस्कृति का उल्लास उपहार लिए उन चारों राहों की संधि पर मिलता था जिसके एक कोण में उस प्रवाह से मिल एकांत शुष्क आज वह ठूँठ खड़ा है। उसके अभाग्यों की परंपरा में संभवत: एक ही सुखद अपवाद है उसके अंदर का स्नेहरस सूख जाने से संज्ञा का लोप हो जाना। संज्ञा लुप्त हो जाने से कष्ट की अनुभूति कम हो जाती है। आम की छतनार डालियों के कारण क्या होता था?
  • A. यात्रियों को आम के फल खाने को मिलते थे।
  • B. चारों ओर अँधेरा होता था।
  • C. यात्रियों की थकान मिटती थी और विश्राम मिलता था।
  • D. यात्रियों को प्राणवायु मिलती थी।
Correct Answer: Option C - आम की छतनार डालियों के कारण यात्रियों की थकान मिटती थी और विश्राम मिलता था।
C. आम की छतनार डालियों के कारण यात्रियों की थकान मिटती थी और विश्राम मिलता था।

Explanations:

आम की छतनार डालियों के कारण यात्रियों की थकान मिटती थी और विश्राम मिलता था।