Correct Answer:
Option A - ऊर्जा के परम्परागत स्रोत (कोयला, तेल एवं गैस) के स्थान पर वैकल्पिक ऊर्जा (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा) के प्रयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहन देने से विश्व के ऊर्जा संकट का समाधान किया जा सकता है, क्योंकि ये ऊर्जा के नवीकरणीय (असमाप्य) संसाधन हैं और इनसे पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता है। इन संसाधनों के समुचित प्रयोग के लिए उच्च एवं सस्ती प्रौद्योगिकी का विकास किया जा रहा हैं।
A. ऊर्जा के परम्परागत स्रोत (कोयला, तेल एवं गैस) के स्थान पर वैकल्पिक ऊर्जा (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा) के प्रयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहन देने से विश्व के ऊर्जा संकट का समाधान किया जा सकता है, क्योंकि ये ऊर्जा के नवीकरणीय (असमाप्य) संसाधन हैं और इनसे पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता है। इन संसाधनों के समुचित प्रयोग के लिए उच्च एवं सस्ती प्रौद्योगिकी का विकास किया जा रहा हैं।