Correct Answer:
Option D - प्रमाणन से लेखो की शुद्धता का ज्ञान होता है। यदि अंकेक्षक प्रमाणन के कार्य को चतुराई से पूरा कर लेता है, तो आगे का कार्य सरल हो जाता है। प्रमाणन को अंकेक्षण की रीढ़ की हड्डी भी कहा जाता है। प्रमाणन निम्नलिखित प्रकार से सम्बन्धित होता है।-
i. लेन-देनों की आधिकारिता एवं प्रमाणिकता से संबंधित
ii. प्रलेखीय साक्ष्यों की वैधता से सम्बन्धित
iii. पुस्तकों में अभिलेखित प्रविष्टियों एवं खतौनियों की शुद्धता से सम्बन्धित।
D. प्रमाणन से लेखो की शुद्धता का ज्ञान होता है। यदि अंकेक्षक प्रमाणन के कार्य को चतुराई से पूरा कर लेता है, तो आगे का कार्य सरल हो जाता है। प्रमाणन को अंकेक्षण की रीढ़ की हड्डी भी कहा जाता है। प्रमाणन निम्नलिखित प्रकार से सम्बन्धित होता है।-
i. लेन-देनों की आधिकारिता एवं प्रमाणिकता से संबंधित
ii. प्रलेखीय साक्ष्यों की वैधता से सम्बन्धित
iii. पुस्तकों में अभिलेखित प्रविष्टियों एवं खतौनियों की शुद्धता से सम्बन्धित।