Correct Answer:
Option D - एकमात्रो भवेत् ह्रस्वो द्विमात्रो दीर्घ उच्यते।
त्रिमात्रस्तु प्लुतो ज्ञेयो व्यञ्जनं चार्धमात्रकम्।।
मात्रायें मुख्यत: तीन होती हैं – 1- हृस्वमात्रा 2- दीर्घमात्रा 3- प्लुत मात्रा। इन्हीं को एकमात्रिक, द्विमात्रिक तथा त्रिमात्रिक भी कहते हैं।
D. एकमात्रो भवेत् ह्रस्वो द्विमात्रो दीर्घ उच्यते।
त्रिमात्रस्तु प्लुतो ज्ञेयो व्यञ्जनं चार्धमात्रकम्।।
मात्रायें मुख्यत: तीन होती हैं – 1- हृस्वमात्रा 2- दीर्घमात्रा 3- प्लुत मात्रा। इन्हीं को एकमात्रिक, द्विमात्रिक तथा त्रिमात्रिक भी कहते हैं।