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Q: ‘वामन: बलिं वसुधां याचते’– वाक्य में रेखांकित शब्द में किस सूत्र से कर्मकारक (द्वितीया विभक्ति) है?
  • A. अकथितं च
  • B. कर्तुरीप्सिततमं कर्म
  • C. कर्मणि द्वितीया
  • D. अधिशीङ्स्थासां कर्म
Correct Answer: Option A - ‘वामन: बलिं वसुधां याचते’ में ‘बलि’ की अपादान संज्ञा प्राप्त थी किन्तु ‘अकथितं च’ सूत्र से ‘याच्’ धातुरूप क्रिया होने के कारण बलि की कर्म संज्ञा हुई तथा द्वितीय विभक्ति का प्रयोग हुआ। ‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’ सूत्र कर्म संज्ञा विधायक सूत्र है तथा ‘कर्मणि द्वितीया’ कर्म संज्ञा से द्वितीय विभक्ति का विधान करता है जबकि ‘अधिशीङ्स्थासां कर्म’ सूत्र शी, स्था और आस् धातुओं के पूर्व ‘अधि’ उपसर्ग होने पर इन धातुओं के आधार की ‘कर्म संज्ञा’ का विधान करता है।
A. ‘वामन: बलिं वसुधां याचते’ में ‘बलि’ की अपादान संज्ञा प्राप्त थी किन्तु ‘अकथितं च’ सूत्र से ‘याच्’ धातुरूप क्रिया होने के कारण बलि की कर्म संज्ञा हुई तथा द्वितीय विभक्ति का प्रयोग हुआ। ‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’ सूत्र कर्म संज्ञा विधायक सूत्र है तथा ‘कर्मणि द्वितीया’ कर्म संज्ञा से द्वितीय विभक्ति का विधान करता है जबकि ‘अधिशीङ्स्थासां कर्म’ सूत्र शी, स्था और आस् धातुओं के पूर्व ‘अधि’ उपसर्ग होने पर इन धातुओं के आधार की ‘कर्म संज्ञा’ का विधान करता है।

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‘वामन: बलिं वसुधां याचते’ में ‘बलि’ की अपादान संज्ञा प्राप्त थी किन्तु ‘अकथितं च’ सूत्र से ‘याच्’ धातुरूप क्रिया होने के कारण बलि की कर्म संज्ञा हुई तथा द्वितीय विभक्ति का प्रयोग हुआ। ‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’ सूत्र कर्म संज्ञा विधायक सूत्र है तथा ‘कर्मणि द्वितीया’ कर्म संज्ञा से द्वितीय विभक्ति का विधान करता है जबकि ‘अधिशीङ्स्थासां कर्म’ सूत्र शी, स्था और आस् धातुओं के पूर्व ‘अधि’ उपसर्ग होने पर इन धातुओं के आधार की ‘कर्म संज्ञा’ का विधान करता है।