Correct Answer:
Option A - ‘‘विलक्षण बात यह है कि आधुनिक गद्य - साहित्य की परम्परा का प्रवर्तक नाटक से हुआ।’’ प्रस्तुत कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी ने कहा है। रामचन्द्र शुक्ल जी ने आलोचना के क्षेत्र में ‘विरुधों का सामंजस्य सिद्धान्त’ का परिवर्तन किया।
प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ -
गोस्वामी तुलसीदास (1923 ई.)
जायसी ग्रंथावली (1924 ई.)
भ्रमर गीतसार (1925 ई.)
काव्य में रहस्यवाद (1929 ई.)
A. ‘‘विलक्षण बात यह है कि आधुनिक गद्य - साहित्य की परम्परा का प्रवर्तक नाटक से हुआ।’’ प्रस्तुत कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी ने कहा है। रामचन्द्र शुक्ल जी ने आलोचना के क्षेत्र में ‘विरुधों का सामंजस्य सिद्धान्त’ का परिवर्तन किया।
प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ -
गोस्वामी तुलसीदास (1923 ई.)
जायसी ग्रंथावली (1924 ई.)
भ्रमर गीतसार (1925 ई.)
काव्य में रहस्यवाद (1929 ई.)