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Q: Who among the following was the founder of the Young Bengal Movement? यंग बंगाल आन्दोलन का प्रवर्तक निम्नलिखित में से कौन था?
  • A. Henry Vivian Derozio/हेनरी विवियन डिरोजिओ
  • B. David Hare/डेविड हेअर
  • C. Dwarkanath Tagore/द्वारकानाथ टैगोर
  • D. Prasanna Kumar Tagore/प्रसन्न कुमार टैगोर
Correct Answer: Option A - हेनरी विवियन डिरोजिओ कलकत्त्ता के हिन्दू कॉलेज में अध्यापक थे। ये ‘यंग बंगाल आन्दोलन’ के प्रवर्तक थे। वे फ्रांस की क्रांति से प्रभावित थे। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण और मुक्त ढंग से सोचने, सभी आधारों की प्रामाणिकता की जाँच करने, मुक्ति, समानता, स्वतंत्रता से प्रेम करने और सत्य की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। डेरोजियो के अनुयायियों ने सभी प्राचीन जर्जर परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का विरोध किया। नोट- प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पाण्डुरंग द्वारा 1867 ई. में मुम्बई में की गयी थी। जबकि मोतीलाल घोष एवं शिशिर कुमार घोष ने कलकत्ता से बांग्ला भाषा में ‘अमृत बाजार पत्रिका’ का प्रकाशन प्रारम्भ किया।
A. हेनरी विवियन डिरोजिओ कलकत्त्ता के हिन्दू कॉलेज में अध्यापक थे। ये ‘यंग बंगाल आन्दोलन’ के प्रवर्तक थे। वे फ्रांस की क्रांति से प्रभावित थे। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण और मुक्त ढंग से सोचने, सभी आधारों की प्रामाणिकता की जाँच करने, मुक्ति, समानता, स्वतंत्रता से प्रेम करने और सत्य की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। डेरोजियो के अनुयायियों ने सभी प्राचीन जर्जर परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का विरोध किया। नोट- प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पाण्डुरंग द्वारा 1867 ई. में मुम्बई में की गयी थी। जबकि मोतीलाल घोष एवं शिशिर कुमार घोष ने कलकत्ता से बांग्ला भाषा में ‘अमृत बाजार पत्रिका’ का प्रकाशन प्रारम्भ किया।

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हेनरी विवियन डिरोजिओ कलकत्त्ता के हिन्दू कॉलेज में अध्यापक थे। ये ‘यंग बंगाल आन्दोलन’ के प्रवर्तक थे। वे फ्रांस की क्रांति से प्रभावित थे। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण और मुक्त ढंग से सोचने, सभी आधारों की प्रामाणिकता की जाँच करने, मुक्ति, समानता, स्वतंत्रता से प्रेम करने और सत्य की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। डेरोजियो के अनुयायियों ने सभी प्राचीन जर्जर परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का विरोध किया। नोट- प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पाण्डुरंग द्वारा 1867 ई. में मुम्बई में की गयी थी। जबकि मोतीलाल घोष एवं शिशिर कुमार घोष ने कलकत्ता से बांग्ला भाषा में ‘अमृत बाजार पत्रिका’ का प्रकाशन प्रारम्भ किया।