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Q: उपर्युक्तगद्यांशानुसारेण ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ इति कस्य कथनम्
  • A. लक्ष्मणस्य
  • B. विभीषणस्य
  • C. महर्षिदयानन्दस्य
  • D. रामचन्द्रस्य
Correct Answer: Option D - उपर्युक्त गद्यांशानुसारेण ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ इति कथनम् रामचन्द्रस्य अस्ति। अर्थात् –उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ यह कथन रामचन्द्र का है। अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।। लङ्का से प्रस्थान करते हुए राम चन्द्र लक्ष्मण से कहते है ‘‘लक्ष्मण यह लंका स्वर्णमयी होती हुयी भी मुझे अच्छी नहीं लगती है। क्योंकि जननी तथा जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।
D. उपर्युक्त गद्यांशानुसारेण ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ इति कथनम् रामचन्द्रस्य अस्ति। अर्थात् –उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ यह कथन रामचन्द्र का है। अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।। लङ्का से प्रस्थान करते हुए राम चन्द्र लक्ष्मण से कहते है ‘‘लक्ष्मण यह लंका स्वर्णमयी होती हुयी भी मुझे अच्छी नहीं लगती है। क्योंकि जननी तथा जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।

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उपर्युक्त गद्यांशानुसारेण ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ इति कथनम् रामचन्द्रस्य अस्ति। अर्थात् –उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार ‘‘जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ यह कथन रामचन्द्र का है। अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।। लङ्का से प्रस्थान करते हुए राम चन्द्र लक्ष्मण से कहते है ‘‘लक्ष्मण यह लंका स्वर्णमयी होती हुयी भी मुझे अच्छी नहीं लगती है। क्योंकि जननी तथा जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।