Correct Answer:
Option D - ‘रणद्भिराघट्टनया नभस्वत: पृथग्विभिन्नश्रुति मण्डलै: स्वरै:’ श्लोकांशेऽस्मिन् ‘नभस्वत:’ इति पदस्य-अर्थो ‘वायो:’ अस्ति। अर्थात् महाकवि ‘माघ’ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ महाकाव्य से यह श्लोकांश अवतरित है, इसमें देवर्षि नारद की वीणा (महती) से उनको पहचानने का क्रम परिलच्छित है अत: ‘नभस्वत:’ का अर्थ वायु ही है जिससे विकल्प (d) सही है शेष अन्य विकल्प प्रश्नानुसार गलत हैं।
D. ‘रणद्भिराघट्टनया नभस्वत: पृथग्विभिन्नश्रुति मण्डलै: स्वरै:’ श्लोकांशेऽस्मिन् ‘नभस्वत:’ इति पदस्य-अर्थो ‘वायो:’ अस्ति। अर्थात् महाकवि ‘माघ’ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ महाकाव्य से यह श्लोकांश अवतरित है, इसमें देवर्षि नारद की वीणा (महती) से उनको पहचानने का क्रम परिलच्छित है अत: ‘नभस्वत:’ का अर्थ वायु ही है जिससे विकल्प (d) सही है शेष अन्य विकल्प प्रश्नानुसार गलत हैं।