Correct Answer:
Option B - महात्मा गाँधी ने 12 मार्च, 1930 ई. को साबरमती आश्रम से 78 अनुयायियो के साथ दाण्डी मार्च आरंभ की। 24 दिन की यात्रा के पश्चात 5 अप्रैल को दाण्डी पहुँचे और 6 अप्रैल को एक मुट्ठी नमक उठाकर नमक कानून का उल्लंघन किया। इस प्रकार गॉधी जी ने सरकार को दिखा दिया कि भारतीय अनुचित कानूनों को तोड़ देंगे। यह पहली राष्ट्रवादी गतिविधि थी, जिसमें औरतों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। पूरे तटीय भारत में नमक कानून का उल्लंघन किया गया। नमक सत्याग्रह सविनय अवज्ञा का एक रूप था। तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने तंजोर के समुद्र तट पर अप्रैल, 1930 में नमक कानून तोड़ने हेतु त्रिचनापल्ली (त्रिचिनोपोली) से वेदारण्यम तक की यात्रा की।
नोट- दाण्डी यात्रा (12 मार्च 1930) प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवम्बर 1930) से पहले हुआ था, न कि बाद में।
B. महात्मा गाँधी ने 12 मार्च, 1930 ई. को साबरमती आश्रम से 78 अनुयायियो के साथ दाण्डी मार्च आरंभ की। 24 दिन की यात्रा के पश्चात 5 अप्रैल को दाण्डी पहुँचे और 6 अप्रैल को एक मुट्ठी नमक उठाकर नमक कानून का उल्लंघन किया। इस प्रकार गॉधी जी ने सरकार को दिखा दिया कि भारतीय अनुचित कानूनों को तोड़ देंगे। यह पहली राष्ट्रवादी गतिविधि थी, जिसमें औरतों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। पूरे तटीय भारत में नमक कानून का उल्लंघन किया गया। नमक सत्याग्रह सविनय अवज्ञा का एक रूप था। तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने तंजोर के समुद्र तट पर अप्रैल, 1930 में नमक कानून तोड़ने हेतु त्रिचनापल्ली (त्रिचिनोपोली) से वेदारण्यम तक की यात्रा की।
नोट- दाण्डी यात्रा (12 मार्च 1930) प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवम्बर 1930) से पहले हुआ था, न कि बाद में।