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Q: भारत के राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है?
  • A. क्षमा–दंडादेश और दोषसिद्धि से मुक्ति देना
  • B. परिहार–मूल सजा के स्थान पर कम सजा देना
  • C. लघुकरण – सजा के एक रूप को दूसरे रूप में बदलना
  • D. प्रविलंबन – दंडादेश के निष्पादन पर थोड़े समय के लिए रोक लगा देना
Correct Answer: Option B - राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति अनुच्छेद 72 के तहत एक अद्र्ध-न्यायिक प्रक्रिया है। वह किसी दण्ड के लिए दोषी ठहराये गये व्यक्ति के दण्ड को क्षमा, प्राबिलम्बन, परिहार, विराम या लघुकरण कर सकता है। क्षमा - दण्डादेश और दोषसिद्धि से मुक्ति देना। लघुकरण - सजा के एक रूप को दूसरे रूप में बदलना। प्रविलंबन - दण्डा देश के निष्पादन पर थोड़े समय के लिए रोक लगा देना। परिहार- इसके तहत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किये बिना दण्ड की मात्रा को कम कर दिया जाता है, जैसे- 14 वर्ष की सजा को कम करके 8 वर्ष कर देना।
B. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति अनुच्छेद 72 के तहत एक अद्र्ध-न्यायिक प्रक्रिया है। वह किसी दण्ड के लिए दोषी ठहराये गये व्यक्ति के दण्ड को क्षमा, प्राबिलम्बन, परिहार, विराम या लघुकरण कर सकता है। क्षमा - दण्डादेश और दोषसिद्धि से मुक्ति देना। लघुकरण - सजा के एक रूप को दूसरे रूप में बदलना। प्रविलंबन - दण्डा देश के निष्पादन पर थोड़े समय के लिए रोक लगा देना। परिहार- इसके तहत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किये बिना दण्ड की मात्रा को कम कर दिया जाता है, जैसे- 14 वर्ष की सजा को कम करके 8 वर्ष कर देना।

Explanations:

राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति अनुच्छेद 72 के तहत एक अद्र्ध-न्यायिक प्रक्रिया है। वह किसी दण्ड के लिए दोषी ठहराये गये व्यक्ति के दण्ड को क्षमा, प्राबिलम्बन, परिहार, विराम या लघुकरण कर सकता है। क्षमा - दण्डादेश और दोषसिद्धि से मुक्ति देना। लघुकरण - सजा के एक रूप को दूसरे रूप में बदलना। प्रविलंबन - दण्डा देश के निष्पादन पर थोड़े समय के लिए रोक लगा देना। परिहार- इसके तहत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किये बिना दण्ड की मात्रा को कम कर दिया जाता है, जैसे- 14 वर्ष की सजा को कम करके 8 वर्ष कर देना।