Correct Answer:
Option A - ‘रेहला’ नामक पुस्तक के रचनाकार अबु अब्दुल्ला मुहम्मद उर्फ़ इब्नबतूता था। इसका जन्म 1304 ई. में (मोरक्को) अफ्रीका में हुआ था। वह मुहम्मद-बिन-तुगलक के समय 1333 ई. में भारत आया और करीब 14 वर्षों तक रहा। इब्नबतूता ने रेहला नामक पुस्तक अरबी भाषा में लिखा है। यह पुस्तक इब्नबतूता का यात्रा वृतांत है। रेहला में मुहम्मद बिन तुगलक के व्यक्तित्व व चरित्र, तत्कालीन समाज, अर्थव्यवस्था, सैनिक प्रणाली, तुगलक द्वारा राजधानी परिवर्तन, न्याय व्यवस्था, डाक व्यवस्था का विस्तृत विवरण मिलता है। मुहम्मद बिन तुगलक ने इसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया तथा 1342 ई. में सुल्तान ने इब्नबतूता को राजदूत बनाकर चीन सम्राट तोगर तिमूर के दरबार में भेजा किन्तु वह बीच में ही वापस लौट आया और बाद में वह मोरक्को (अपने देश) वापस लौट गया। इब्नबतूता दक्षिण अफ्रीका, पश्चिमी अफ्रीका, दक्षिणी एवं पूर्वी यूरोप, भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य एशिया दक्षिण पूर्व एशिया एवं चीन क्षेत्र आदि देखा जिसमें आज के 44 देश आते हैं और कुल मिलाकर लगभग 73000 किमी. की दूरी अपने तीस वर्षो के यात्रा जीवन में तय की थी।
A. ‘रेहला’ नामक पुस्तक के रचनाकार अबु अब्दुल्ला मुहम्मद उर्फ़ इब्नबतूता था। इसका जन्म 1304 ई. में (मोरक्को) अफ्रीका में हुआ था। वह मुहम्मद-बिन-तुगलक के समय 1333 ई. में भारत आया और करीब 14 वर्षों तक रहा। इब्नबतूता ने रेहला नामक पुस्तक अरबी भाषा में लिखा है। यह पुस्तक इब्नबतूता का यात्रा वृतांत है। रेहला में मुहम्मद बिन तुगलक के व्यक्तित्व व चरित्र, तत्कालीन समाज, अर्थव्यवस्था, सैनिक प्रणाली, तुगलक द्वारा राजधानी परिवर्तन, न्याय व्यवस्था, डाक व्यवस्था का विस्तृत विवरण मिलता है। मुहम्मद बिन तुगलक ने इसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया तथा 1342 ई. में सुल्तान ने इब्नबतूता को राजदूत बनाकर चीन सम्राट तोगर तिमूर के दरबार में भेजा किन्तु वह बीच में ही वापस लौट आया और बाद में वह मोरक्को (अपने देश) वापस लौट गया। इब्नबतूता दक्षिण अफ्रीका, पश्चिमी अफ्रीका, दक्षिणी एवं पूर्वी यूरोप, भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य एशिया दक्षिण पूर्व एशिया एवं चीन क्षेत्र आदि देखा जिसमें आज के 44 देश आते हैं और कुल मिलाकर लगभग 73000 किमी. की दूरी अपने तीस वर्षो के यात्रा जीवन में तय की थी।