Correct Answer:
Option B - साहित्यदर्पणे ‘नवपलाशपलाशवनं पुर: स्फुटपराग- परागतपज्र्जम् इति श्लोको निर्दिष्ट उदाहरणरूपेण यमकस्य।
साहित्यदर्पण के प्रस्तुत उदाहरण में पलाश (पलाश वन, नये पत्ते) तथा पराग (पुष्प का पराग, धूप) के दो भिन्न अर्थ हैं। अत: यमक अलज्रर है।
यमक अलज्रर के लक्षण -
सत्यर्थे पृथगर्थाया: स्वरव्यंजनसंहते:।
क्रमेण तेनैवावृत्तिर्यमकं विनिगद्यते।।
अनुप्रास अलङ्कार का लक्षण-
‘अनुप्रास: शब्दसाम्यं वैषम्येऽपि स्वरस्य यत्।।’
श्लेष अलङ्कार का लक्षण -
वाच्यभेदेन भिन्ना यद् युग पद्भाषणस्पृश:।
श्लिष्यन्ति शब्दा: श्लेषोऽसावक्षरादिभिरष्टधा।
वक्रोक्ति अलङ्कार के लक्षण -
अन्यस्यान्यार्थकं वाक्यमन्यथा योजयेद्यादि।
अन्य श्लेषेण काक्वा वा सा वक्रोक्तिस्ततो द्विधा।
B. साहित्यदर्पणे ‘नवपलाशपलाशवनं पुर: स्फुटपराग- परागतपज्र्जम् इति श्लोको निर्दिष्ट उदाहरणरूपेण यमकस्य।
साहित्यदर्पण के प्रस्तुत उदाहरण में पलाश (पलाश वन, नये पत्ते) तथा पराग (पुष्प का पराग, धूप) के दो भिन्न अर्थ हैं। अत: यमक अलज्रर है।
यमक अलज्रर के लक्षण -
सत्यर्थे पृथगर्थाया: स्वरव्यंजनसंहते:।
क्रमेण तेनैवावृत्तिर्यमकं विनिगद्यते।।
अनुप्रास अलङ्कार का लक्षण-
‘अनुप्रास: शब्दसाम्यं वैषम्येऽपि स्वरस्य यत्।।’
श्लेष अलङ्कार का लक्षण -
वाच्यभेदेन भिन्ना यद् युग पद्भाषणस्पृश:।
श्लिष्यन्ति शब्दा: श्लेषोऽसावक्षरादिभिरष्टधा।
वक्रोक्ति अलङ्कार के लक्षण -
अन्यस्यान्यार्थकं वाक्यमन्यथा योजयेद्यादि।
अन्य श्लेषेण काक्वा वा सा वक्रोक्तिस्ततो द्विधा।