Explanations:
भारत में संविधान सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय दोनों को न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति देता है। सर्वोच्च न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में स्पष्ट कर दिया है कि न्याययिक पुनरावलोकन भारतीय संविधान की बुनियादी विशिष्टता है तथा इसे संविधान संशोधन के जरिए बदलने का अधिकार संसद को नहीं है।