Correct Answer:
Option A - मार्क्सवादियों के अनुसार, राज्य एक वर्गीय संरचना है। मार्क्स के अनुसार, आदिम साम्यवादी अवस्था में समाज के सदस्यों के बीच हितों का कोई संघर्ष नहीं था, इसलिए सम्पूर्ण समाज मिलकर अपने मामलों का प्रबंध स्वयं कर लेता था और राज्य का कोई अस्तित्व नही था लेकिन दास-प्रथा के युग में स्थिति बदल गई। इस युग में स्वामियों के हाथ में भूमि, सम्पत्ति और उत्पादन के समस्त साधन थे और वे दासों का शोषण करते थे। स्वामी के विरूद्ध अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए उन्हें शक्ति का आश्रय लेना पड़ा। इनके द्वारा सेना, पुलिस, न्यायालय और कारागार आदि की व्यवस्था की गई। इन संस्थाओं पर उन लोगों का अधिकार था, जो शोषक वर्ग के समर्थक थे। यहीं से राज्य संस्था का सूत्रपात हुआ। इस प्रकार राज्य संस्था का निर्माण एक वर्ग का दूसरे वर्गो पर अधिपत्य और नियंत्रण रखने के लिए किया गया।
A. मार्क्सवादियों के अनुसार, राज्य एक वर्गीय संरचना है। मार्क्स के अनुसार, आदिम साम्यवादी अवस्था में समाज के सदस्यों के बीच हितों का कोई संघर्ष नहीं था, इसलिए सम्पूर्ण समाज मिलकर अपने मामलों का प्रबंध स्वयं कर लेता था और राज्य का कोई अस्तित्व नही था लेकिन दास-प्रथा के युग में स्थिति बदल गई। इस युग में स्वामियों के हाथ में भूमि, सम्पत्ति और उत्पादन के समस्त साधन थे और वे दासों का शोषण करते थे। स्वामी के विरूद्ध अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए उन्हें शक्ति का आश्रय लेना पड़ा। इनके द्वारा सेना, पुलिस, न्यायालय और कारागार आदि की व्यवस्था की गई। इन संस्थाओं पर उन लोगों का अधिकार था, जो शोषक वर्ग के समर्थक थे। यहीं से राज्य संस्था का सूत्रपात हुआ। इस प्रकार राज्य संस्था का निर्माण एक वर्ग का दूसरे वर्गो पर अधिपत्य और नियंत्रण रखने के लिए किया गया।