Correct Answer:
Option D - 9 महीने के बाद, जब बच्चे को माता के गर्भ से वातावरण में डाला जाता है, तो उस अवस्था को ‘‘शिशु-अवस्था’’ कहा जाता है।
अर्थात् जन्म से पाचवें वर्ष तक की अवस्था को शैशवावस्था कहा जाता है। इस अवस्था को समायोजन की अवस्था भी कहते हैं यह अवस्था तब होती हैं, जब शिशु असहाय स्थितियों में उनके मूल प्रवृृत्तियों, आवश्यकताओं एवं शक्तियों को लेकर इस संसार मे आता है, वह दूसरो पर निर्भर होता हैं। इस अवस्था मे शिशु का विकास तीव्र गति से होता हैं।
D. 9 महीने के बाद, जब बच्चे को माता के गर्भ से वातावरण में डाला जाता है, तो उस अवस्था को ‘‘शिशु-अवस्था’’ कहा जाता है।
अर्थात् जन्म से पाचवें वर्ष तक की अवस्था को शैशवावस्था कहा जाता है। इस अवस्था को समायोजन की अवस्था भी कहते हैं यह अवस्था तब होती हैं, जब शिशु असहाय स्थितियों में उनके मूल प्रवृृत्तियों, आवश्यकताओं एवं शक्तियों को लेकर इस संसार मे आता है, वह दूसरो पर निर्भर होता हैं। इस अवस्था मे शिशु का विकास तीव्र गति से होता हैं।