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Q: The Gupta - VAkataka age saw the development of which significant school of Indian philosophy focusing on logical reasoning and debate? गुप्त - वाकाटक युग में तार्किक तर्क और बहस पर ध्यान केन्द्रित करते हुए भारतीय दर्शन के किस महत्वपूर्ण स्कूल का विकास हुआ?
  • A. Vaisheshika/वैशेषिक
  • B. Mimansa/मीमांसा
  • C. Nyaya/न्याय
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above/उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - जिस समय उत्तर भारत में गुप्तवंश अपने चरमोत्कर्ष स्थिति को प्राप्त करने में लगा हुआ था। उसी समय दक्कन की राजनीति में एक प्रबल शक्ति के रूप में वाकाटक वंश का उदय हुआ गुप्तों तथा वाकाटकों की सम्मिलित शक्ति के कारण ही शकों का विनाश सम्भव हो पाया था। गुप्त-वाकाटक युग में तार्किक तर्क और बहस पर ध्यान केन्द्रित होने के फलस्वरूप भारतीय दर्शन के ‘न्याय’ स्कूल का विकास हुआ। न्याय या विश्लेषण पद्धति का विकास तर्क शास्त्र के रूप में हुआ है। इस दर्शन में तर्क का महत्व प्रतिपादित होने के पश्चात भारतीय विद्वान तार्किक रीति से सोचने और बहस करने की ओर झुके।
C. जिस समय उत्तर भारत में गुप्तवंश अपने चरमोत्कर्ष स्थिति को प्राप्त करने में लगा हुआ था। उसी समय दक्कन की राजनीति में एक प्रबल शक्ति के रूप में वाकाटक वंश का उदय हुआ गुप्तों तथा वाकाटकों की सम्मिलित शक्ति के कारण ही शकों का विनाश सम्भव हो पाया था। गुप्त-वाकाटक युग में तार्किक तर्क और बहस पर ध्यान केन्द्रित होने के फलस्वरूप भारतीय दर्शन के ‘न्याय’ स्कूल का विकास हुआ। न्याय या विश्लेषण पद्धति का विकास तर्क शास्त्र के रूप में हुआ है। इस दर्शन में तर्क का महत्व प्रतिपादित होने के पश्चात भारतीय विद्वान तार्किक रीति से सोचने और बहस करने की ओर झुके।

Explanations:

जिस समय उत्तर भारत में गुप्तवंश अपने चरमोत्कर्ष स्थिति को प्राप्त करने में लगा हुआ था। उसी समय दक्कन की राजनीति में एक प्रबल शक्ति के रूप में वाकाटक वंश का उदय हुआ गुप्तों तथा वाकाटकों की सम्मिलित शक्ति के कारण ही शकों का विनाश सम्भव हो पाया था। गुप्त-वाकाटक युग में तार्किक तर्क और बहस पर ध्यान केन्द्रित होने के फलस्वरूप भारतीय दर्शन के ‘न्याय’ स्कूल का विकास हुआ। न्याय या विश्लेषण पद्धति का विकास तर्क शास्त्र के रूप में हुआ है। इस दर्शन में तर्क का महत्व प्रतिपादित होने के पश्चात भारतीय विद्वान तार्किक रीति से सोचने और बहस करने की ओर झुके।