Correct Answer:
Option A - परिणाम की प्रतिलिपि प्रस्तुत करने की सीमा परिशुद्धि होती है।
किसी मापन प्रणाली की परिशुद्धता का अर्थ यह है कि कई बार, अपरिवर्तित स्थितियों में उसी राशि का मापन करने पर प्राप्त मान एक निश्चित मान के कितना आस-पास बना रहे। अत: परिशुद्धता को पुनरुत्पादका भी कह सकते हैं।
किसी मापन को वैध या अच्छा तब मानते हैं। जब वह ‘‘यथार्थ एवं परिशुद्ध’’ हो।
A. परिणाम की प्रतिलिपि प्रस्तुत करने की सीमा परिशुद्धि होती है।
किसी मापन प्रणाली की परिशुद्धता का अर्थ यह है कि कई बार, अपरिवर्तित स्थितियों में उसी राशि का मापन करने पर प्राप्त मान एक निश्चित मान के कितना आस-पास बना रहे। अत: परिशुद्धता को पुनरुत्पादका भी कह सकते हैं।
किसी मापन को वैध या अच्छा तब मानते हैं। जब वह ‘‘यथार्थ एवं परिशुद्ध’’ हो।