Correct Answer:
Option B - हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा का सूत्रपात फ्रेंच विद्वान गार्सा-द-तासी ने किया। इन्होंने फ्रेंच भाषा में `इस्त्वार द ला लितरेत्युर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी' नामक इतिहास ग्रंथ लिखा जिसमें हिन्दी और उर्दू के अनेक कवियों का विवरण अंग्रेजी के वर्णक्रमानुसार दिया गया है। इस इतिहास ग्रंथ का प्रथम भाग 1839 में तथा द्वितीय भाग 1847 में प्रकाशित हुआ। जार्ज ग्रियर्सन द्वारा 1888 में लिखे गए इतिहास ग्रंथ - `द मॉडर्न वर्नेक्युलर लिट्रेचर ऑफ हिन्दुस्तान' को सच्चे अर्थों में हिन्दी साहित्य का पहला इतिहास कहा जाता है। मिश्र बन्धुओं द्वारा लिखा गया इतिहास ग्रंथ `मिश्र बन्धु विनोद' चार भागों में विभक्त है। हिन्दी साहित्योतिहास लेखन की परम्परा में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा 1929 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित `हिन्दी शब्द सागर' की भूमिका के रूप में लिखा गया इतिहास ग्रंथ - `हिन्दी साहित्य का इतिहास' हिन्दी का प्रथम वैज्ञानिक इतिहास है।
B. हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा का सूत्रपात फ्रेंच विद्वान गार्सा-द-तासी ने किया। इन्होंने फ्रेंच भाषा में `इस्त्वार द ला लितरेत्युर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी' नामक इतिहास ग्रंथ लिखा जिसमें हिन्दी और उर्दू के अनेक कवियों का विवरण अंग्रेजी के वर्णक्रमानुसार दिया गया है। इस इतिहास ग्रंथ का प्रथम भाग 1839 में तथा द्वितीय भाग 1847 में प्रकाशित हुआ। जार्ज ग्रियर्सन द्वारा 1888 में लिखे गए इतिहास ग्रंथ - `द मॉडर्न वर्नेक्युलर लिट्रेचर ऑफ हिन्दुस्तान' को सच्चे अर्थों में हिन्दी साहित्य का पहला इतिहास कहा जाता है। मिश्र बन्धुओं द्वारा लिखा गया इतिहास ग्रंथ `मिश्र बन्धु विनोद' चार भागों में विभक्त है। हिन्दी साहित्योतिहास लेखन की परम्परा में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा 1929 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित `हिन्दी शब्द सागर' की भूमिका के रूप में लिखा गया इतिहास ग्रंथ - `हिन्दी साहित्य का इतिहास' हिन्दी का प्रथम वैज्ञानिक इतिहास है।