Explanations:
भारत में लोकसभा का अध्यक्ष, लोकसभा सदस्यों की शक्तियों व विशेषाधिकारों का अभिभावक होता है। सभी संसदीय मामलों में उसका निर्णय अंतिम होता है एवं दसवीं अनुसूची के तहत लोकसभा के किसी सदस्य की अयोग्यता से सम्बन्धित मुद्दे पर निर्णय भी लोकसभा अध्यक्ष ही लेता है। 10वीं अनुसूची के तहत दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता से संबंधित उपबंध मूल संविधान में नहीं था। इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1954 के द्वारा जोड़ा गया। किसी भी सदन के अध्यक्ष या सभापति द्वारा सदस्यों की अयोग्यता का विनिश्चय किया जाएगा तथा उसका विनिश्चय अंतिम होगा।