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Q: ‘वन्दे वाणी विनायकौ’ निबंध संकलन के रचयिता कौन हैं?
  • A. विद्यानिवास मिश्र
  • B. रामवृक्ष बेनीपुरी
  • C. गुलाबराय
  • D. प्रतापनारायण मिश्र
Correct Answer: Option B - रामवृक्ष बेनीपुरी के निबन्ध संग्रह- गेहूँ और गुलाब (1950), तथा वन्दे वाणी विनायकौ (1954) प्रताप नारायण मिश्र के निबन्ध-धोखा, दाँत, बालक वृद्ध, आप, भौ, नारी, मुच्छ, ह, द, घूरे का लत्ता बिने, अपव्यय, वृद्ध दान, ईश्वर की मूर्ति, होली है अथवा होरी। डॉ. विद्या निवास मिश्र के निबन्ध-संग्रह-छितवन की छाँह (1953) हल्दी दूब (1955) तुम चन्दन हम पानी (1957), मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974), तमाल के झरोखे से (1981), संचारिणी (1982), शिरीष की याद आई (1995), कुबेरनाथ राय के निबन्ध संग्रह-प्रिया नीलकण्ठी (1968), रस आखेटक (1970), विषाद योग (1973), निषाद बासुरी (1974), पर्णमुकुट (1978, महाकवि की तर्जनी (1979), मराल (1993), उत्तर कुरु (1994), वाणी का क्षीर सागर (1998), अन्धकार में अग्निशिखा (1998), आगम की नाव (2002)।
B. रामवृक्ष बेनीपुरी के निबन्ध संग्रह- गेहूँ और गुलाब (1950), तथा वन्दे वाणी विनायकौ (1954) प्रताप नारायण मिश्र के निबन्ध-धोखा, दाँत, बालक वृद्ध, आप, भौ, नारी, मुच्छ, ह, द, घूरे का लत्ता बिने, अपव्यय, वृद्ध दान, ईश्वर की मूर्ति, होली है अथवा होरी। डॉ. विद्या निवास मिश्र के निबन्ध-संग्रह-छितवन की छाँह (1953) हल्दी दूब (1955) तुम चन्दन हम पानी (1957), मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974), तमाल के झरोखे से (1981), संचारिणी (1982), शिरीष की याद आई (1995), कुबेरनाथ राय के निबन्ध संग्रह-प्रिया नीलकण्ठी (1968), रस आखेटक (1970), विषाद योग (1973), निषाद बासुरी (1974), पर्णमुकुट (1978, महाकवि की तर्जनी (1979), मराल (1993), उत्तर कुरु (1994), वाणी का क्षीर सागर (1998), अन्धकार में अग्निशिखा (1998), आगम की नाव (2002)।

Explanations:

रामवृक्ष बेनीपुरी के निबन्ध संग्रह- गेहूँ और गुलाब (1950), तथा वन्दे वाणी विनायकौ (1954) प्रताप नारायण मिश्र के निबन्ध-धोखा, दाँत, बालक वृद्ध, आप, भौ, नारी, मुच्छ, ह, द, घूरे का लत्ता बिने, अपव्यय, वृद्ध दान, ईश्वर की मूर्ति, होली है अथवा होरी। डॉ. विद्या निवास मिश्र के निबन्ध-संग्रह-छितवन की छाँह (1953) हल्दी दूब (1955) तुम चन्दन हम पानी (1957), मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974), तमाल के झरोखे से (1981), संचारिणी (1982), शिरीष की याद आई (1995), कुबेरनाथ राय के निबन्ध संग्रह-प्रिया नीलकण्ठी (1968), रस आखेटक (1970), विषाद योग (1973), निषाद बासुरी (1974), पर्णमुकुट (1978, महाकवि की तर्जनी (1979), मराल (1993), उत्तर कुरु (1994), वाणी का क्षीर सागर (1998), अन्धकार में अग्निशिखा (1998), आगम की नाव (2002)।