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Q: दामुल का कैदी के लेखक कौन हैं –
  • A. प्रसाद
  • B. सुदर्शन
  • C. प्रेमचन्द
  • D. यशपाल
Correct Answer: Option C - दामुल का कैदी , पंचपरमेश्वर, बूढ़ी काकी, मंत्र, ईदगाह, शतरंज के खिलाड़ी, सवा सेर गेहूँ, आत्माराम, ठाकुर का कुआँ, पूस की रात, नमक का दरोगा, कफन, अलग्योझा, आपबीती आदि युग प्रवर्तक कहानीकार प्रेमचन्द द्वारा लिखी गई कहानियाँ हैं। दामुल का कैदी प्रेमचन्द की प्रारम्भिक कहानी है। इसमें लोकवार्ताओं का प्रभाव है। आकाशदीप, आँधी, पुरस्कार, ममता, देवरथ, प्रतिध्वनि, सालवती, मधुवा तथा इन्द्रजाल जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ हैं। हार की जीत, दो मित्र, कवि की स्त्री, प्रेम तरु, पत्थरों का सौदागर, कमल की बेटी तथा तीर्थयात्रा सुदर्शन द्वारा लिखी गई कहानियाँ हैं। परहा, आदमी और खच्चर, फूलों का कुर्ता, पिंजरे की उड़ान, सच बोलने की भूल आदि यशपाल की कहानियाँ हैं।
C. दामुल का कैदी , पंचपरमेश्वर, बूढ़ी काकी, मंत्र, ईदगाह, शतरंज के खिलाड़ी, सवा सेर गेहूँ, आत्माराम, ठाकुर का कुआँ, पूस की रात, नमक का दरोगा, कफन, अलग्योझा, आपबीती आदि युग प्रवर्तक कहानीकार प्रेमचन्द द्वारा लिखी गई कहानियाँ हैं। दामुल का कैदी प्रेमचन्द की प्रारम्भिक कहानी है। इसमें लोकवार्ताओं का प्रभाव है। आकाशदीप, आँधी, पुरस्कार, ममता, देवरथ, प्रतिध्वनि, सालवती, मधुवा तथा इन्द्रजाल जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ हैं। हार की जीत, दो मित्र, कवि की स्त्री, प्रेम तरु, पत्थरों का सौदागर, कमल की बेटी तथा तीर्थयात्रा सुदर्शन द्वारा लिखी गई कहानियाँ हैं। परहा, आदमी और खच्चर, फूलों का कुर्ता, पिंजरे की उड़ान, सच बोलने की भूल आदि यशपाल की कहानियाँ हैं।

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दामुल का कैदी , पंचपरमेश्वर, बूढ़ी काकी, मंत्र, ईदगाह, शतरंज के खिलाड़ी, सवा सेर गेहूँ, आत्माराम, ठाकुर का कुआँ, पूस की रात, नमक का दरोगा, कफन, अलग्योझा, आपबीती आदि युग प्रवर्तक कहानीकार प्रेमचन्द द्वारा लिखी गई कहानियाँ हैं। दामुल का कैदी प्रेमचन्द की प्रारम्भिक कहानी है। इसमें लोकवार्ताओं का प्रभाव है। आकाशदीप, आँधी, पुरस्कार, ममता, देवरथ, प्रतिध्वनि, सालवती, मधुवा तथा इन्द्रजाल जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ हैं। हार की जीत, दो मित्र, कवि की स्त्री, प्रेम तरु, पत्थरों का सौदागर, कमल की बेटी तथा तीर्थयात्रा सुदर्शन द्वारा लिखी गई कहानियाँ हैं। परहा, आदमी और खच्चर, फूलों का कुर्ता, पिंजरे की उड़ान, सच बोलने की भूल आदि यशपाल की कहानियाँ हैं।