Correct Answer:
Option A - ‘‘जम सतजुग-थापन-करन, नासन म्लेच्छ-आचा़र।
कठिन धार तरवार कर, कृष्ण कल्कि अवतार।।’’
उपर्युक्त मंगलाचरण भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत ‘भारत दुर्दशा’ (1880 ई.) नाटक का है।
‘भारत दुर्दशा’ नाटक राष्ट्रीय चेतना का पहला हिंदी नाटक है जो वीर, शृंगार और करूण रस पर आधारित है। इस नाटक में कुल छ: (6) अंक हैं।
भारत दुर्दशा नाटक के प्रमुख पात्र - योगी, भारत भाग्य, भारत, भारत दुर्दैव, निर्लज्जता, सत्यानाश, फौजदार, रोग, आलस्य, अन्धकार, और डिसलॉयलटी।
भारतेन्दु के प्रमुख नाटक- वैदिकी हिंसा-हिंसा न भवती (1873ई.), सत्यहरिश्चन्द्र (1875ई.), विषस्य विषमौषधम (1876ई.), नील देवी (1881ई.), अन्धेर नगरी (1881ई.), प्रेम जोगिनी (1874ई.) आदि।
अंधायुग (1955ई.) धर्मवीर भारती का, सिंदूर की होली (1934ई.) लक्ष्मीनारायण मिश्र का तथा एक और द्रोणाचार्य (1977 ई.) शंकर शेष की नाट्य कृतियाँ हैं।
A. ‘‘जम सतजुग-थापन-करन, नासन म्लेच्छ-आचा़र।
कठिन धार तरवार कर, कृष्ण कल्कि अवतार।।’’
उपर्युक्त मंगलाचरण भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत ‘भारत दुर्दशा’ (1880 ई.) नाटक का है।
‘भारत दुर्दशा’ नाटक राष्ट्रीय चेतना का पहला हिंदी नाटक है जो वीर, शृंगार और करूण रस पर आधारित है। इस नाटक में कुल छ: (6) अंक हैं।
भारत दुर्दशा नाटक के प्रमुख पात्र - योगी, भारत भाग्य, भारत, भारत दुर्दैव, निर्लज्जता, सत्यानाश, फौजदार, रोग, आलस्य, अन्धकार, और डिसलॉयलटी।
भारतेन्दु के प्रमुख नाटक- वैदिकी हिंसा-हिंसा न भवती (1873ई.), सत्यहरिश्चन्द्र (1875ई.), विषस्य विषमौषधम (1876ई.), नील देवी (1881ई.), अन्धेर नगरी (1881ई.), प्रेम जोगिनी (1874ई.) आदि।
अंधायुग (1955ई.) धर्मवीर भारती का, सिंदूर की होली (1934ई.) लक्ष्मीनारायण मिश्र का तथा एक और द्रोणाचार्य (1977 ई.) शंकर शेष की नाट्य कृतियाँ हैं।