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Q: ‘तद्दोषौ शब्दार्थौ समुणावनलंकृति पुन: क्वापि।’-किसका काव्य लक्षण है?
  • A. जयदेव
  • B. दण्डी
  • C. मम्मट
  • D. हेमचन्द्र
Correct Answer: Option C - ‘तद्दोषौ शब्दार्थौ समुणावनलंकृति पुन: क्वापि–आचार्य मम्मट का काव्य लक्षण है। जयदेव ने कहा है– निर्दोषा लक्षणवती सरीतिर्गुण भूषणा। सालंकार रसानेक वृत्तिर्वावकाव्य नामवाक्।। दण्डी ने काव्य लक्षण दिया– शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिना पदावली। संस्कृत के आचार्यों ने मुख्यत: तीन आधारों पर किया है- शब्द और अर्थ के आधार पर, शब्द, रस और ध्वनि के आधार पर
C. ‘तद्दोषौ शब्दार्थौ समुणावनलंकृति पुन: क्वापि–आचार्य मम्मट का काव्य लक्षण है। जयदेव ने कहा है– निर्दोषा लक्षणवती सरीतिर्गुण भूषणा। सालंकार रसानेक वृत्तिर्वावकाव्य नामवाक्।। दण्डी ने काव्य लक्षण दिया– शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिना पदावली। संस्कृत के आचार्यों ने मुख्यत: तीन आधारों पर किया है- शब्द और अर्थ के आधार पर, शब्द, रस और ध्वनि के आधार पर

Explanations:

‘तद्दोषौ शब्दार्थौ समुणावनलंकृति पुन: क्वापि–आचार्य मम्मट का काव्य लक्षण है। जयदेव ने कहा है– निर्दोषा लक्षणवती सरीतिर्गुण भूषणा। सालंकार रसानेक वृत्तिर्वावकाव्य नामवाक्।। दण्डी ने काव्य लक्षण दिया– शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिना पदावली। संस्कृत के आचार्यों ने मुख्यत: तीन आधारों पर किया है- शब्द और अर्थ के आधार पर, शब्द, रस और ध्वनि के आधार पर