Correct Answer:
Option D - जब किसी भूमि पर लगातार सीवेज प्रवाहित किया जाता है तो मृदा कणों के रन्ध्रों में सीवेज की अशुद्धियाँ तथा चिपचिपे पदार्थ भर जाते है, जिसके कारण वायु इन रन्ध्रों से ठीक से संचारित नहीं हो पाता जिससे मृदा में अवायुजीवी दशा उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण सीवेज का अपघटन शुरू हो जाता है व उससे H₂S गैस उत्पन्न होना प्रारम्भ हो जाती है व वातावरण में दुर्गन्ध फैल जाती है यह घटना सीवेज सिकनेस कहलाता है।
D. जब किसी भूमि पर लगातार सीवेज प्रवाहित किया जाता है तो मृदा कणों के रन्ध्रों में सीवेज की अशुद्धियाँ तथा चिपचिपे पदार्थ भर जाते है, जिसके कारण वायु इन रन्ध्रों से ठीक से संचारित नहीं हो पाता जिससे मृदा में अवायुजीवी दशा उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण सीवेज का अपघटन शुरू हो जाता है व उससे H₂S गैस उत्पन्न होना प्रारम्भ हो जाती है व वातावरण में दुर्गन्ध फैल जाती है यह घटना सीवेज सिकनेस कहलाता है।