Explanations:
जेंडर पहचान स्व अवधारणा विकास में पहला चरण है, जिसमें बच्चा स्वयं को सही ढंग से लेबल करता है और दूसरों को पुरुष या महिला के रूप में सटीक रूप से वर्गीकृत करना शुरू करता है। जन्म के समय से ही लड़के और लड़कियों को उनके अलग-अलग रूप में ढालने की जो सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया शुरू होती है उसे ‘जेंडरीकरण’ कहा जा सकता है। हर समाज में एक नर या मादा बच्चे को धीरे-धीरे मर्द या स्त्री के रूप में उसकी पुरूषोचित या स्त्रियोचित विशेषाताओं के साथ विकसित किया जाता है।