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Q: Assertion : There is serious problem of environment degradation in the world. कथन (A) विश्व में पर्यावरण अवक्रम की गम्भीर समस्या है। Reason: The main reason for the problem is degradation of soil and forests. कारण (R) इस समस्या का प्रमुख कारण है, मिट्टी एवं वनों का अवक्रमण। Code:/कूट :
  • A. (A) is true but (R) is false (A) सही है परन्तु (R) गलत है
  • B. (A) and (R) both are true (A) एवं (R) दोनों सही हैं
  • C. (A) is false but (R) is true (A) असत्य है परन्तु (R) सत्य है
  • D. (A) is true but (R) is partially true (A) सही है परन्तु (R) आंशिक रूप से ही सही है
Correct Answer: Option D - सामान्य रूप से जनसाधारण के लिए पर्यावरण अवनयन तथा पर्यावरण प्रदूषण समानार्थी होते हैं, क्योंकि दोनों का सम्बन्ध पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास से होता है किन्तु इनके कारकों तथा इनके प्रभाव के क्षेत्र एवं मापक के आधार पर इनमें अन्तर स्थापित किया जा सकता है। पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है मात्र मनुष्य के कार्यों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास जबकि पर्यावरण अवनयन/अवक्रमण का अर्थ होता है–मानवीय क्रियाओं तथा प्राकृतिक प्रक्रमों द्वारा स्थानीय, प्रादेशिक तथा विश्व स्तरों पर पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास तथा अवनयन है। उदाहरणार्थ – ज्वालामुखी उद्भेदन, भूकम्प, स्थलखण्ड में उत्थान एवं अवतलन, वलन एवं भ्रंशन, वायुमण्डलीय तूफान (यथा – टाइफून, हरिकेन, टॉरनेडो), बाढ़ तथा सूखा, प्राकृतिक कारणों से वन में अग्नि का प्रकोप, प्राकृतिक विद्युत विसर्जन (lightening) उपलवृष्टि (ओलापात), अति हिमपात, भौमिकीय अपरदन; भूस्खलन आदि प्राकृतिक कारक हैं।
D. सामान्य रूप से जनसाधारण के लिए पर्यावरण अवनयन तथा पर्यावरण प्रदूषण समानार्थी होते हैं, क्योंकि दोनों का सम्बन्ध पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास से होता है किन्तु इनके कारकों तथा इनके प्रभाव के क्षेत्र एवं मापक के आधार पर इनमें अन्तर स्थापित किया जा सकता है। पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है मात्र मनुष्य के कार्यों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास जबकि पर्यावरण अवनयन/अवक्रमण का अर्थ होता है–मानवीय क्रियाओं तथा प्राकृतिक प्रक्रमों द्वारा स्थानीय, प्रादेशिक तथा विश्व स्तरों पर पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास तथा अवनयन है। उदाहरणार्थ – ज्वालामुखी उद्भेदन, भूकम्प, स्थलखण्ड में उत्थान एवं अवतलन, वलन एवं भ्रंशन, वायुमण्डलीय तूफान (यथा – टाइफून, हरिकेन, टॉरनेडो), बाढ़ तथा सूखा, प्राकृतिक कारणों से वन में अग्नि का प्रकोप, प्राकृतिक विद्युत विसर्जन (lightening) उपलवृष्टि (ओलापात), अति हिमपात, भौमिकीय अपरदन; भूस्खलन आदि प्राकृतिक कारक हैं।

Explanations:

सामान्य रूप से जनसाधारण के लिए पर्यावरण अवनयन तथा पर्यावरण प्रदूषण समानार्थी होते हैं, क्योंकि दोनों का सम्बन्ध पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास से होता है किन्तु इनके कारकों तथा इनके प्रभाव के क्षेत्र एवं मापक के आधार पर इनमें अन्तर स्थापित किया जा सकता है। पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है मात्र मनुष्य के कार्यों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास जबकि पर्यावरण अवनयन/अवक्रमण का अर्थ होता है–मानवीय क्रियाओं तथा प्राकृतिक प्रक्रमों द्वारा स्थानीय, प्रादेशिक तथा विश्व स्तरों पर पर्यावरण की गुणवत्ता में ह्रास तथा अवनयन है। उदाहरणार्थ – ज्वालामुखी उद्भेदन, भूकम्प, स्थलखण्ड में उत्थान एवं अवतलन, वलन एवं भ्रंशन, वायुमण्डलीय तूफान (यथा – टाइफून, हरिकेन, टॉरनेडो), बाढ़ तथा सूखा, प्राकृतिक कारणों से वन में अग्नि का प्रकोप, प्राकृतिक विद्युत विसर्जन (lightening) उपलवृष्टि (ओलापात), अति हिमपात, भौमिकीय अपरदन; भूस्खलन आदि प्राकृतिक कारक हैं।