Correct Answer:
Option C - केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ने हिन्दी की मानक वर्णमाला में मूलत: 11 स्वर और 35 व्यंजन-ध्वनियों को स्थान दिया है।
वर्ण भाषा की ध्वनियों के उच्चरित तथा लिखित दोनों रूपों के प्रतीक हैं। लिपि-चिह्न भाषा के लिखित रूप के प्रतीक होते हैं। इस दृष्टि से लिपि-चिह्न वर्ण के अंतर्गत आते हैं। इन वर्णों के क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित समूह को ‘वर्णमाला’ कहते हैं।
‘केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय’ द्वारा विद्वानों के विचार-विमर्श के पश्चात् हिन्दी वर्णमाला तथा अंकों का अद्यतन मानव स्वरूप निर्धारित किया गया है जो इस प्रकार है–
स्वर– अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
संस्कृत के लिए प्रयुक्त देवनागरी में ऋृ, ऌ तथा ऌृ भी सम्मिलित है, किन्तु हिन्दी में इनका प्रयोग न होने के कारण इन्हें हिन्दी की मानक वर्णमाला में स्थान नहीं दिया गया है।
C. केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ने हिन्दी की मानक वर्णमाला में मूलत: 11 स्वर और 35 व्यंजन-ध्वनियों को स्थान दिया है।
वर्ण भाषा की ध्वनियों के उच्चरित तथा लिखित दोनों रूपों के प्रतीक हैं। लिपि-चिह्न भाषा के लिखित रूप के प्रतीक होते हैं। इस दृष्टि से लिपि-चिह्न वर्ण के अंतर्गत आते हैं। इन वर्णों के क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित समूह को ‘वर्णमाला’ कहते हैं।
‘केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय’ द्वारा विद्वानों के विचार-विमर्श के पश्चात् हिन्दी वर्णमाला तथा अंकों का अद्यतन मानव स्वरूप निर्धारित किया गया है जो इस प्रकार है–
स्वर– अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
संस्कृत के लिए प्रयुक्त देवनागरी में ऋृ, ऌ तथा ऌृ भी सम्मिलित है, किन्तु हिन्दी में इनका प्रयोग न होने के कारण इन्हें हिन्दी की मानक वर्णमाला में स्थान नहीं दिया गया है।